सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ट्रांसजेंडर महिला को दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षक के रूप में भर्ती के लिए “ट्रांसजेंडर” श्रेणी के तहत आवेदन करने की अनुमति दी है। साथ ही दिल्ली सरकार के अधीन सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग रिक्तियों और एक व्यापक भर्ती नीति की मांग करने वाली उसकी व्यापक याचिका पर विचार करने के लिए सहमति व्यक्त की।
यह आदेश 31 वर्षीय जेन कौशिक द्वारा दायर याचिका पर आया है। जस्टिस जेबी परदीवाला और केवी विश्वनाथन की बेंच ने दिल्ली सरकार, शिक्षा निदेशालय (DoE), समाज कल्याण विभाग, दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (DSSSB) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
अंतरिम राहत प्रदान करते हुए अदालत ने कौशिक को DSSSB के ऑनलाइन आवेदन पंजीकरण प्रणाली (OARS) पोर्टल के माध्यम से ट्रांसजेंडर उम्मीदवार के रूप में अपना आवेदन जमा करने की अनुमति दी। कौशिक के वकील ने बताया था कि यह प्लेटफॉर्म अभी भी आवेदकों को “पुरुष” और “महिला” के दो लिंग विकल्पों तक ही सीमित रखता है।
पीठ ने कहा कि हम भी वही राहत दे रहे हैं। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के एक जज ने कौशिक को ट्रांसजेंडर श्रेणी में आवेदन करने की अनुमति दी थी। अदालत को बताया गया कि कौशिक ने पहले ही ओएआरएस पोर्टल पर पंजीकरण करा लिया था, लेकिन वह अपने आवेदन के साथ आगे नहीं बढ़ सकीं, क्योंकि पोर्टल पर केवल “पुरुष” और “महिला” श्रेणियां ही सूचीबद्ध थीं।
हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान दी गई राहत को ध्यान में रखते हुए पीठ ने समान संरक्षण प्रदान किया और यह सुनिश्चित किया कि लिंग वर्गीकरण के आधार पर उनके आवेदन को खारिज नहीं किया जाएगा।
कौशिक की याचिका में सार्वजनिक रोजगार में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की मान्यता और भर्ती प्रक्रियाओं में उनके समावेशन के प्रावधानों की कमी के बारे में व्यापक चिंताएं उठाई गई हैं। उन्होंने शिक्षण पदों में ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए अलग रिक्तियों को अधिसूचित करने, एक समर्पित भर्ती नीति बनाने और वैधानिक आदेशों के अनुसार, आयु और योग्यता में छूट देने के निर्देश देने की मांग की है।
उनकी याचिका में ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और 2020 में बनाए गए नियमों को लागू करने की भी मांग की गई है, जो रोजगार में गैर-भेदभाव को अनिवार्य बनाते हैं और संस्थानों को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए बाध्य करते हैं।
इस मामले की पहले दिल्ली हई कोर्ट में जांच की गई थी। जनवरी 2023 में जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने कौशिक को ट्रांसजेंडर उम्मीदवार के रूप में शिक्षण पदों के लिए आवेदन करने की अनुमति दी और निर्देश दिया कि रिक्ति अधिसूचनाओं में लिंग संबंधी विशिष्टताओं की परवाह किए बिना उनके आवेदन पर कार्रवाई की जाए।
हाई कोर्ट ने यह बात नोट की थी कि कौशिक, जिनके पास राजनीति विज्ञान, शिक्षा और प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल (Political Science, Education and early childhood care) में डिग्री है, भेदभावपूर्ण भर्ती अधिसूचनाओं और आवेदन पोर्टल में मौजूद सीमाओं के कारण शिक्षण पदों के लिए आवेदन करने में असमर्थ थे।
अक्टूबर 2025 के एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने खराब कार्यान्वयन के कारण ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को उपलब्ध वैधानिक सुरक्षा को “निष्क्रिय” बताया था। इसके अलावा, इसने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और अन्य क्षेत्रों को कवर करने वाली समान अवसर नीति तैयार करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय सलाहकार समिति का भी गठन किया था।
हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद किशोरी का कंकाल बरामद, लापरवाही के आरोप में 28 पुलिसकर्मी निलंबित
झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो से लापता 18 साल की लड़की के मामले में 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। शनिवार को इस मामले में एक नाटकीय मोड़ तब आया जब उसके कंकाल के अवशेष बरामद हुए। जिसके बाद हाई कोर्ट ने यह एक्शन लिया। इससे पहले कोर्ट ने इस केस में पुलिस की लापरवाही को लेकर सवाल खड़े किए थे। जिसमें एफआईआर में देरी, परिवार को परेशान करना शामिल है। पढ़ें पूरी खबर।
