इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूलों में हिजाब पहनने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता के लिए यूनिफॉर्म जरूरी है। वहीं, अब इस मामले पर राजनीति तेज हो चुकी है। कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद से लेक AIMIM चीफ औवैसी भी अपनी राय व्यक्त कर चुके हैं।
अब हाई कोर्ट के इस फैसले को लेकर भाजपा नेता शाज़िया इल्मी स्वागत योग्य बताया है। शाजिया इल्मी ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हिजाब को लेकर जो फैसला दिया है, वह स्वागत योग्य है। पहले भी कई फैसले आए हैं। उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर अपना फैसला एकदम साफ किया है।
भाजपा नेता शाजिया इल्मी बोलीं- हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं
शाजिया इल्मी ने कहा, “कुरान शरीफ में हिजाब को अनिवार्य मानने को लेकर कोई भी जिक्र नहीं है। कोई भी आयत इसको लेकर नहीं कहती है। उन्होंने कहा कि जो कुरान के पांच स्तंभ हैं उसमें से हिजाब पहनना या अपने चेहरे को कबर करना लाजिमी नहीं है यानी अनिवार्य नहीं माना गया है। उन्होंने लोग मानते हैं कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा है, लोग मानते हैं, कल्चरली मानते हैं, लेकिन अनिवार्य हिस्सा नहीं है और इस बात को एक बार फिर से इलाहाबाद हाई कोर्ट ने क्लियर कर दिया है।
राहुल गांधी की टिप्पणी पर शाजिया इल्मी ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा उठने पर राहुल गांधी का पितृसत्ता के खिलाफ संघर्ष कहां चला जाता है? क्या मुस्लिम महिलाओं को समान नागरिक संहिता (UCC) के मामले में महिला नहीं माना जाता, जिसका उनकी पार्टी लगातार और पुरजोर विरोध करती रही है? उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी वाकई गंभीर हैं, तो उन्हें यूसीसी कानून लाना चाहिए। इससे तुरंत पता चल जाएगा कि कौन महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ा है और कौन उनका विरोध करता है।
ओवैसी बोले- यह हमारा धर्म है, हम तय करेंगे
वहीं, इससे पहले ओवैसी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले की कड़ी आलोचना की थी। जिसमें स्कूल में हिजाब पहनने की इजाजत मांगने वाली एक मुस्लिम लड़की की याचिका को खारिज कर दिया गया था। इस फैसले को इस्लाम पर हमला बताते हुए ओवैसी ने कहा कि यह तय करना जजों का काम नहीं है कि इस्लाम के लिए क्या जरूरी है और क्या नहीं। ओवैसी ने कहा, “यह हमारा धर्म है और हम तय करेंगे कि क्या जरूरी है। जज कौन होते हैं यह तय करने वाले? यह हमारे धर्म पर हमला है।”
ओवैसी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही सबरीमाला से जुड़े जरूरी धार्मिक रीति-रिवाजों के मामले की सुनवाई कर रहा है। उन्होंने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इस मामले को देख रहा है तो इलाहाबाद के जजों को इस पर फैसला नहीं सुनाना चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा, “इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश संविधान के आर्टिकल 19 और 25 के खिलाफ है।”
सलमान खुर्शीद ने क्या कहा?
वहीं, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ये फैसला कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Essentiality पर जाने की आवश्यकता नहीं है। आप सिर्फ ये तय करें कि स्वत: अधिकार एक व्यक्ति के क्या होते हैं, क्या कपड़े पहनने हैं, क्या खाना खाना है, कहां पर आपको पढ़ना है, कैसे रहना है। ये तो सुप्रीम कोर्ट इस बात को तय कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को तय करके ये भी कहा था कि हम इसे एक बड़े बेंच में ले जाएंगे। मैं नहीं समझता हूं कि इलाहाबाद हाई कोर्ट का जो फैसला आया है वो बहुत प्रभावी होगा। सुप्रीम कोर्ट इस पर कुछ संकेत दे चुका है और आगे जो फैसला होगा वो सुप्रीम कोर्ट का होगा।”
मामला क्या है?
प्रयागराज की एक छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए याचिका दायर की थी। याचिका में स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति मांगी गई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी। हाई कोर्ट ने यह फैसला 21 अगस्त सुनाया था।
‘हिजाब इस्लामी आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं’, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज की छात्रा की याचिका
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक छात्रा को स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि हिजाब पहनना इस्लाम में एक अनिवार्य प्रथा है, यह साबित करने के लिए कोई भी तथ्यात्मक या कानूनी साम्रगी प्रस्तुत नहीं की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि उसी समुदाय की छात्राओं सहित स्कूल की कोई अन्य छात्रा हिजाब नहीं पहनती है। पढ़ें पूरी खबर।
