Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन पर रोक लगाने में नाकाम रहने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य तंत्र के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “यह सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है। हलफनामों में लिखा है कि आपके पास हथियार नहीं हैं। फिर राज्य सरकार का अस्तित्व ही क्यों है? यह बहुत अजीब बात है। खनन माफिया जिन खुदाई मशीनों और बुलडोजरों का इस्तेमाल करते हैं, वे धर्मनिरपेक्ष हैं। वे लोगों की जाति नहीं देखते। इसके विपरीत। हमें यहीं रुक जाना चाहिए। बेहद दुखद स्थिति है। राज्य सरकारें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं या यूं कहें कि वे मिलीभगत कर रही हैं।”
किस मामले पर सुनवाई कर रहा था सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत के समक्ष स्वीकार किया था कि चंबल क्षेत्र में सक्रिय अवैध रेत खनन माफियाओं का सामना करने के लिए उसके अधिकारियों के पास पर्याप्त हथियार नहीं थे। कोर्ट राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अवैध रेत खनन के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रहा था।
सुनवाई के दौरान, मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए एएसजी एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि फोरेस्ट गॉर्ड की हाल ही में हुई मौत की जांच चल रही है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि अटेर-फतेहपुर पुल के नीचे से अवैध रेत खनन की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है जो जल्द ही अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
क्या पुल गिरने के बाद रिपोर्ट आएगी- कोर्ट
फिर कोर्ट ने सवाल किया, “क्या वह रिपोर्ट पुल गिरने और लोगों की मौत होने के बाद आएगी?” एएसजी ने जवाब दिया कि रिपोर्ट 1 हफ्ते में दे दी जाएगी। जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की कि राज्य ने आखिर खुदाई की अनुमति क्यों दी? जस्टिस ने कहा, “राज्य ने इसकी अनुमति क्यों दी? क्या राज्य के अधिकारी अंधे हैं।” जस्टिस मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि माफिया किस प्रकार राज्य के अधिकारियों को निशाना बना रहा था।
अदालती वकील ने कोर्ट को क्या-क्या बताया?
इस मामले में एमिकस क्यूरी (अदालती वकील) के रूप में वरिष्ठ वकील निखिल गोयल ने बताया कि चंबल अभयारण्य में राजस्थान और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले पुल में 34 पिलर्स हैं। इनमें से 8 पिलर्स के पास की रेत खोदी जा चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिलर्स के नीचे से 25-50 फीट तक रेत हटा दी गई है। जनता को संभावित आपदा के बारे में आगाह करते हुए गोयल ने कहा कि औसतन प्रतिदिन 5000 लोग इस पुल से गुजरते हैं।
लालू यादव को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। इसमें उन्होंने कथित लैंड फॉर जॉब स्कैम की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इस मामले में कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, लेकिन यादव को मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपनी कानूनी आपत्तियां उठाने की अनुमति दी। पढ़ें पूरी खबर…
