तेलंगाना हाई कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी भागीरथ को पॉक्सो मामले में सशर्त जमानत दे दी है। हाई कोर्ट ने POCSO मामले में बंदी भागीरथ को रेगुलर जमानत दे दी है। इसके लिए उन्हें 1 लाख रुपये और दो जमानतदार देने होंगे, साथ ही कुछ अन्य शर्तें भी पूरी करनी होंगी।
कोर्ट ने आरोपी को यह भी निर्देश दिया कि वह गवाहों को प्रभावित न करे और न ही जांच में कोई दखल दे।
चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल से बंदी भागीरथ होगा रिहा
बंदी भागीरथ अभी चेर्लापल्ली सेंट्रल जेल में बंद हैं, कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब उसे रिहा किया जाएगा। बंदी भागीरथ के खिलाफ पेट बशीरबाद पुलिस थाने में पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।
हाईकोर्ट ने किया था गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार
इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने 15 मई की रात को बंदी भागीरथ को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था। बंदी भागीरथ के वकील एस निरंजन रेड्डी ने दलील दी थी कि पुलिस को उसे गिरफ्तार न करने का निर्देश दिया जाए और अंतरिम अवधि के दौरान उन पर कड़ी शर्तें लगाई जाएं। हालांकि, दो घंटे से अधिक चली सुनवाई के अंत में, जस्टिस टी माधवी देवी ने कहा, “मैंने पीड़ित का बयान सरसरी तौर पर पढ़ा है, हालांकि विस्तार से नहीं और इस स्तर पर मैं कोई अंतरिम आदेश देने के पक्ष में नहीं हूं।”
क्या है मामला?
जानकारी दे दें कि बंदी भागीरथ पर अक्टूबर और दिसंबर 2025 के बीच एक 17 वर्षीय लड़की से यौन उत्पीड़न करने का आरोप है। बताया जाता है कि दोनों की मुलाकात जून 2025 में दोस्तों के जरिए हुई थी।
8 मई 2026 को पेटबशीरबाद पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में लड़की की मां ने आरोप लगाया कि बंदी भागीरथ ने बार-बार उनकी बेटी के साथ यौन शोषण किया और उसे ब्लैकमेल भी किया। शिकायत के अनुसार, उसने कथित तौर पर उसे अलग-थलग कर दिया और उसकी एकेडमिक करियर संबंधी फैसलों पर भी वह निर्णय लेने लगा।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पुलिस ने शुरू में बंदी भागीरथ के खिलाफ किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने और यौन उत्पीड़न के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में, लड़की का बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न का आरोप भी जोड़ दिया।
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