तेलंगाना में एक किसान की एक दशक बाद बीमा कंपनी से भैंस की मौत के बाद पैसा मिला है। तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने किसान को 80,000 भुगतान करने का आदेश दिया है। किसान के भैंस की मौत 10 साल पहले 2016 में गंभीर हेपेटाइटिस के कारण हो गई थी और उसके डाक्यूमेंट कथित तौर पर कूरियर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान खो गए थे।
आयोग ने माना है कि किसान मुआवजे का हकदार है क्योंकि उसने अपना मामला साबित कर दिया है।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. जी राधा रानी, सदस्य मीना रामनाथन और आर.एस.राजश्री वारंगल जिला उपभोग्ता आयोग के एक पूर्व आदेश के खिलाफ ओरिएंटल इश्योरेंस कंपनी द्वारा दायर अपील की सुनवाई की।
किसान ने साबित किया
तेलंगाना राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अपने 8 जून के फैसले में कहा, “मामले में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया और शिकायतकर्ता मुआवजे को प्राप्त करने का हकदार है, जो लाभार्थी हस्तांतरण के जरिए दिया जाएगा क्योंकि उसने निर्विवाद रूप से यह साबित कर दिया है कि वह एक लाभार्थी है।”
यह मामला वारंगल जिले के रामावरम गांव के रहने वाले किसान जे रजनी कुमार का है, उनकी भैंस, जिनका बीमा उन्होंने करवा रखा था, वह फरवरी 2016 में मर गई। बाद में पोस्टमार्टम में मौत का कारण गंभीर हेपेटाइटिस पता चला।
बीमा राशि का दावा करने के लिए रजनी कुमार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, तस्वीरें और भैंस के कान में लगे टैग समेत जरूर डाक्यूमेंट जमा किए। फिर उन्होंने 16 फरवरी 2016 को डीटीडीसी के जरिए हैदराबाद में एक्सीलेंट इंश्योरेंस ब्रोकिंग सर्विसेज लिमिटेड के ग्रामीण बीमा शाखा को डिलीवरी के लिए कूरियर पार्सल बुक किया।
किसान के मुताबिक, पार्सल ने तो बीमा कंपनी के पास पहुंचा और न ही उसे वापस मिला। परिणाम स्वरूप उसका बीमा पास नहीं हो सका। इसके बाद अगस्त 2016 में कानूनी नोटिस भेजने और कोई समाधान न मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
कूरियर कंपनी नहीं दे सकी सबूत
डीटीडीसी और उसके प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि पार्सल बुक किया गया था, लेकिन उन्होंने तर्क दिया कि डिलीवरी पूरी नहीं हो सकी क्योंकि प्राप्तकर्ता का कार्यालय हैदराबाद के माधापुर में बताए गए पते पर नहीं मिला।
उन्होंने दावा किया कि ऑफिस का स्थान बदल दिया दया है और शिकायतकर्ता पर गलत पता देने का आरोप लगाया। कूरियर कंपनी ने यह भी दावा किया कि पार्सल शिकायतकर्ता को लौटा दिया गया था।
हालांकि वह इस बात का प्रमाण देने में विफल रहा कि पैकेज शिकायतकर्ता को वापस सौंप दिया गया था।
आयोग ने पाया कि ट्रैंकिग रिकार्ड कूरियर कंपनी के बयान का समर्थन नहीं करते हैं और पार्सल वापसी साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
बीमा कंपनी ने कहा कि उसे कोई क्लेम मिला ही नहीं
ओरिएंटल कंपनी ने दलील दी कि उसे किसान की ओर से कोई भी क्लेम (दावा) प्रपत्र या क्लेम की सूचना मिला ही नहीं, इसलिए दावे की प्रक्रिया में विफल रहने के लिए उसे दोषी नहीं ठहराया जा सकता है।
बीमा कंपनी ने कहा कि दावा दस्तावेज को जमा करना अनिवार्य था और चूंकि वे दस्तावेज कमी उस तक नहीं पहुंचे, इसलिए कंपनी पर इसका बोझ नहीं डाला जा सकता है।
सबूत को देखने के बाद राज्य आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता किसान ने साबित किया कि उसने सभी जरूरी डाक्यूमेंट वाले पार्सल को बुक किया था और पशुधन बीमा योजना के तहत दावा प्रक्रिया का पालन किया था।
बेंच ने पाया कि कूरियर कंपनी ने पार्सल प्राप्त करने की बात मानी लेकिन बीमा कंपनी को डिलीवरी या किसान को वापसी साबित करने में विफल रही। फलस्वरूप आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि डाक्यूमेंट रास्ते में ही कहीं खो गए।
आयोग ने दावा प्रपत्र-सह-मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पशु चिकित्सा सहायक सर्जन द्वारा प्रमाणित अन्य दस्तावेजों की जांच की, जिसमें पाया कि भैंस की मौत गंभीर बीमारी हेपेटाइटिस के कारण हुई थी।
कमियों की नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
आयोग ने माना कि भैंस के शव परीक्षण के दौरान पता चला कि जानवर की मौत गंभीर बीमारी के कारण हुई है। साथ ही शिकायतकर्ता ने बुकिंग रसीद का सबूत भी पेश किया है और वह अप्राप्त पैकेज की वापसी का इंतजार कर रहा है।
आगे कहा कि चूंकि विपक्षी पक्ष एक से तीन (डीटीसीसी कूरियर एंड कार्गो लिमिटेड) की ओर संतोषजनक जवाब नहीं मिला है, इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि शिकायतकर्ता ने संबंधित दस्तावेज विपक्षी पक्ष संख्या 4 (ओरिएंटल इंश्योरेंस) को भेजे थे, जो उन्हें प्राप्त नहीं हुए और वे इस दावे में कार्रवाई नहीं कर सके। विपक्षी पक्षों की ओर से सेवा में इस कमी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और दावे के प्रोसेसिंग में हुई देरी के लिए विपक्षी पक्षों द्वारा उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
2021 के आदेश में किया संशोधन
वारंगल जिला उपभोक्ता आयोग ने सितंबर 2021 में कूरियर कंपनी को 60000 रुपये की बीमा राशि देने का निर्देश दिया था, जिसमें राज्य आयोग ने इसे आदेश में संशोधन किया।
आयोग ने बीमा कंपनी को 1 सितंबर 2021 से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 60000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया और खोए हुए दस्तावेज के लिए जिम्मेदार कूरियर कंपनी पर लगाए गए 10000 रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा।
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