UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भरोसेमंदर और सबसे ताकतवर नौकरशाहों में शुमार अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद (IAS) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें संजय प्रसाद के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की गई थीं और उनके कार्यकाल पर असर डालने वाले निर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और अतुल चंदुरकर की बेंच ने आईएएस संजय प्रसाद द्वारा दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह स्थगन आदेश जारी कर दिया है लेकिन यह समझना है कि हाईकोर्ट का वो कौन सा मामला है, जिसकी वजह से आईएएस संजय प्रसाद के खिलाफ हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणियां की थीं?
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा विवाद एक महिला की याचिका से शुरू हुआ था, जिसकी नाबालिग बेटी का अपहरण हो गया था और पुलिस उसे ढूंढने में नाकाम रही थी। मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने पाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस राज्य में जांच व्यवस्था सुधारने के पुराने अदालती निर्देशों (सुभाष चंद्र केस, मई 2025) का पालन नहीं कर रही है।
ऐसे में हाई कोर्ट ने गृह विभाग के मुखिया होने के चलते आईएएस संजय प्रसाद से जवाब मांगा था। हाईकोर्ट के मुताबिक इसमें सरकार ने टालमटोल वाला रवैया अपनाया था। कोर्ट को बताया गया कि सरकार इन सुधारों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।
हाई कोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार
योगी सरकार के रुख को लेकर 3 जून को अपने फैसले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संजय प्रसाद के रवैये पर बेहद सख्त नाराजगी जताई थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि संजय प्रसाद का आचरण कोर्ट के अधिकार को कम करने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उत्तर प्रदेश में पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर अदालती सुधारों को लगातार रोकने की कोशिश की जा रही है।
पोस्टिंग को लेकर DoPT को निर्देश
हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को निर्देश दिया था कि संजय प्रसाद के इस आचरण को उनके रिकॉर्ड में रखा जाए, ताकि भविष्य में उनकी किसी भी बड़ी पोस्टिंग या प्रमोशन के समय इस पर विचार किया जा सके। हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा था कि अगर ऐसे अड़ियल अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो अदालतों के आदेश सिर्फ कागजों पर सिमट कर रह जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट से मिली तात्कालिक राहत
बता दें कि हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के खिलाफ आईएएस संजय प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के उन सभी निर्देशों पर रोक लगा दी है जो संजय प्रसाद के खिलाफ दिए गए थे। इस स्टे के बाद फिलहाल उनके सर्विस रिकॉर्ड और भविष्य की नियुक्तियों पर मंडराने वाला खतरा टल गया है।
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केरल में सबसे लंबे हाथी रमन के कॉमर्शियल इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि ऐसा न करने का आदेश पहले ही जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा है कि जब बेजुबान जानवरों की भलाई की बात हो तो कोई मूक दर्शक नहीं रह सकता है। बना रह सकता’। कोर्ट ने केरल सरकार को हाथी की भलाई को लेकर उसे कुछ समय के लिए अपनी देखरेख में रखने को कहा है। पढ़िए पूरी खबर…
