सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें तमिलनाडु की विजय सरकार ने करूर हादसे में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की बात कही थी।
सितंबर, 2025 में सीएम विजय की करूर मे हुई रैली के दौरान हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार और अन्य के द्वारा हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को लेकर नोटिस जारी किया। तमिलनाडु की विजय सरकार ने करूर भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी देने का फैसला किया था।
हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था आदेश
मद्रास हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट का कहना था कि अगर ऐसा किया गया तो भविष्य में सरकारी नौकरियों की मांग की बाढ़ आ सकती है।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी विभागों में पहले से ही बहुत सारे लोग नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
‘क्या सरकार को रोजगार नहीं देना चाहिए…’
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भगदड़ हुई और इसके बाद एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई और सरकार ने पीड़ितों को सांत्वना देने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि क्या सरकार को रोजगार नहीं देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के द्वारा रोजगार देने के फैसले को चुनौती देने को लेकर भी सवाल उठाया। अदालत ने पूछा, इस बात में क्या परेशानी है कि राज्य सरकार किसी हादसे के पीड़ितों को रोजगार दे रही है। अदालत ने कहा कि अगर सरकार प्रभावित परिवारों को मदद देने और उन्हें आर्थिक मुआवजा देने का फैसला लेती है तो इस पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या सरकार को उस व्यक्ति के परिवार को रोजगार नहीं देना चाहिए जो परिवार का इकलौता सदस्य था और उसकी हादसे में मौत हो गई।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने करूर में हुई दर्दनाक भगदड़ को लेकर कहा कि जिंदगी में मिली कोई भी कामयाबी उन 41 लोगों को खोने का दर्द कम नहीं कर सकती। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
