मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम- दोनों पक्षों को धैर्य रखने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वो इस मामले की प्रतिदिन सुनवाई करने और समस्या का समाधान करने के लिए तैयार है।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि विवादित भोजशाला स्थल के पास मुसलमानों को शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे के बीच नमाज पढ़ने के लिए अलग खुली जगह दी जाए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि मुसलमानों के लिए की गई यह व्यवस्था अस्थायी है और अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी। 

‘हर शब्द के इस्तेमाल में बहुत सावधानी बरतनी होगी’

सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि उसे इस मामले इस्तेमाल किए जाने वाले हर शब्द को लेकर बहुत सावधानी बरतनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “ये बहुत संवेदनशील मामले हैं। कोर्ट में कही गई बातों से बेवजह विवाद पैदा हो सकते हैं या गलत संदेश जा सकता है। हमें इस्तेमाल किए जाने वाले हर शब्द को लेकर बहुत सावधान रहना होगा।”

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, “यह पहली बार है जब अंतरिम व्यवस्था से जुड़ा मामला हमारे सामने आ रहा है। हाई कोर्ट के आदेश और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य की बेबसी पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हमारी राय है कि अभी जो भी व्यवस्था लागू है, उसके साथ ही इस मामले को 10 से 15 दिनों के भीतर किसी उपयुक्त बेंच के सामने लिस्ट किया जा सकता है।”

15 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में दिया था फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 15 मई को विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद मामले में फैसला सुनाया था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस विवादित स्थल को वाग्देवी मंदिर माना था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ASI के दशकों पुराने उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को उस जगह पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी।

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हाई कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला परिसर के नक्काशीदार पत्थर के स्तंभों पर गेंदे के फूलों की मालाएं लटकी हुई थीं। श्रद्धालु नंगे पैर मेहराबों के नीचे कतार में खड़े होकर पूजा कर रहे थे, तस्वीरें ले रहे थे और काले पत्थर के फर्श पर फूलों की पंखुड़ियां बिखेर रहे थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें