2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI कमेटी समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि 2000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा UPI पेमेंट पर लगाया जाने वाला 0.4 प्रतिशत MDR (Merchant Discount Rate) आखिर फीस है, टैक्स है या किसी दूसरे तरह का शुल्क।
यह नया MDR फ्रेमवर्क 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है। इसके तहत 2000 रुपये से ज्यादा के कुछ UPI Person-to-Merchant (P2M) लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत तक चार्ज लगाने का प्रावधान है।
यह याचिका वकील अंजन दत्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें 14 दिसंबर को जारी अधिसूचना और 15 सितंबर को जारी MDR फ्रेमवर्क को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि सरकार ने यह फैसला लेने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार का इस्तेमाल नहीं किया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से इस व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अब केंद्र सरकार, RBI, NPCI और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद इस मामले में आगे की सुनवाई होगी।
UPI पर MDR के बाद 18% GST: क्या है नया नियम, कौन देगा टैक्स और किस पर होगा लागू, जानें सबकुछ
UPI से पेमेंट करना आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत के साथ-साथ अब आदत भी बन चुका है। 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate-MDR) लागू होने जा रहा है। इसके साथ ही MDR की रकम पर 18 प्रतिशत जीएसटी भी लगेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 2000 रुपये से ज्यादा का हर यूपीआई पेमेंट करने वाले ग्राहक से 18 फीसदी जीएसटी अलग से लिया जाएगा। GST सीधे पूरे ट्रांजैक्शन पर नहीं बल्कि MDR के रूप में लगने वाली फीस पर लगेगा। यूपीआई पेमेंट एमडीआर में फ्लैट-रेट-मॉडल के तहत पेट्रोल पंप, रेलवे टिकट बुकिंग, इंश्योरेंस प्रीमियम, बिजली-पानी के बिल पेमेंट जैसी आवश्यक सेवाओं पर 5 रुपये एमडीआर ही लगेगा।
UPI के व्यापारिक लेनदेन पर MDR से आएंगे 15000 करोड़
15 अक्टूबर से यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क फिर से लागू होने जा रहा है। 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर 0.4% की दर से लगने वाले इस शुल्क से लगभग 15000 करोड़ रुपये का राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है। यह राशि बैंकों, पेमेंट ऐप्स और पेमेंट सेवा प्रदाताओं के बीच बांटी जाएगी।
