सुप्रीम कोर्ट ने कई उच्च न्यायालयों द्वारा फैसला सुनाने में हो रही देरी से निपटने के लिए निर्देश जारी किए हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया कि वो ऑर्डर रिजर्व करने के तीन महीने के अंदर फैसला सुनाए।
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को जमानत याचिकाओं पर सुनवाई, आदेश सुनाना और आदेश अपलोड करने के काम को उसी दिन पूरा करने का भी निर्देश दिया।
लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हाई कोर्ट्स के लिए कुछ दिशा-निर्देश जारी किए। ये निर्देश उच्च न्यायालयों के लिए “बाध्यकारी निर्देशों” के तौर पर काम करेंगे, ताकि आरक्षित मामलों में फैसले सुनाने में होने वाली देरी से बचा जा सके।
सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 का किया प्रयोग
न्यूज एजेंसी ANI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के आर्टिकल 142 में दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी हाई कोर्ट्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि फैसले सुनाने में ज्यादा देरी न हो। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि जमानत मामलों में आदेश उसी दिन दिए जाएं और अगर फैसला सुरक्षित रखा जाए तो अगले दिन तक जारी कर दिया जाए।
ANI की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियमित बेल मिलने की जानकारी तुरंत ट्रायल कोर्ट तक पहुंचाई जाए ताकि जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैदियों को उसी दिन रिहा किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी फैसले सुनाए जाने के 24 घंटे के भीतर हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालय आम लोगों के लिए न्याय पाने की सबसे अहम जगह हैं इसलिए समय पर फैसले आना बहुत जरूरी है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि ये निर्देश किसी जज या संस्था पर सवाल उठाने के लिए नहीं दिए गए हैं। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार यह फैसला झारखंड हाई कोर्ट में फैसले सुनाने और वेबसाइट पर अपलोड करने में हुई लंबी देरी से जुड़े मामले में आया।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को डिजिटल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
