सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने मंगलवार को कहा कि कोर्ट में जजों की मौखिक टिप्पणियां सोशल मीडिया पर पल भर में वायरल हो जाती हैं और जज के दिन का काम खत्म करके घर पहुंचने से पहले ही वे हर जगह फैल जाती हैं। वे दिल्ली हाई कोर्ट में ‘आईबीसी मंत्र: द लॉ एंड प्रैक्टिस ऑफ इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी’ के लॉन्च के मौके पर बोल रहे थे।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति नाथ ने कहा, “आप अदालत में कुछ कहते हैं, कभी-कभी तो यूं ही और घर पहुंचने से पहले ही वह बात हर जगह फैल जाती है। ट्विटर, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और हर दूसरे प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती है।”

अगर कोई किताब ले जाता था तो इंतजार करना पड़ता था- जस्टिस विक्रम नाथ

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि आज जानकारी के तेजी से फैलने और उस समय कानूनी रिसर्च के तरीके के बीच अंतर भी बताया जब वे इस पेशे में आए थे। उन्होंने कहा कि आज के युवा वकीलों के पास अपने लैपटॉप पर पूरी लाइब्रेरी की सुविधा होती है। उन्होंने बताया कि पहले वकील फिजिकल लाइब्रेरी पर निर्भर रहते थे, जहां अक्सर उन्हें जिस किताब की जरूरत होती थी, उसकी सिर्फ एक ही कॉपी होती थी। अगर कोई और वह किताब ले जाता था, तो उन्हें इंतजार करना पड़ता था या दूसरी लाइब्रेरी में ढूंढनी पड़ती थी।

जस्टिस नाथ ने कहा कि हालांकि पहले कानूनी रिसर्च में ज्यादा समय लगता था, लेकिन यह प्रक्रिया जरूरी नहीं कि नुकसानदायक ही हो। वकील अक्सर अपनी योजना से कहीं ज्यादा पढ़ते थे और एक बात खोजते हुए उन्हें दूसरी ऐसी बात मिल जाती थी जो और भी ज्यादा काम की साबित होती थी।

टेक्नोलॉजी ने कानूनी रिसर्च को बेहतर बनाया है- जस्टिस विक्रम नाथ

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि हालांकि टेक्नोलॉजी ने निश्चित रूप से कानूनी रिसर्च को बेहतर बनाया है, लेकिन इससे अच्छी कानूनी समझ और जानकारी की जरूरत कम नहीं हुई है। जस्टिस नाथ ने कहा, “जानकारी तो बहुत ज्यादा उपलब्ध है। जो चीज मिलना बहुत मुश्किल है, वह है सही नजरिया।”

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सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने मंगलवार को याद किया कि जब वे और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई बेंच पर नियमित रूप से बेंच पर बैठते थे, तो उन्हें बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ के नाम पर प्यार से अमर प्रेम कहा जाता था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…