दिल्ली में प्रवेश करने वाले कमर्शियल वाहनों को अब ज्यादा शुल्क देना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे वाहनों के लिए पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। साथ ही प्रदूषण के खिलाफ इसके निवारक प्रभाव को बनाए रखने के लिए इसमें 5% सालाना बढ़ोतरी अनिवार्य की।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 12/03/2026 को पारित किया था। शुक्रवार को अपलोड किए गए आदेश के जरिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा 1 अप्रैल, 2026 से ECC दरों में संशोधन के लिए प्रस्तुत सिफारिशों को मंजूरी दी। पीठ ने टिप्पणी की कि ये सिफारिशें उचित, न्यायसंगत और निष्पक्ष हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमने CAQM द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर विचार किया और इसे उचित, न्यायसंगत और निष्पक्ष पाया।

ECC दरों का संशोधन

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हर साल 1 अप्रैल से शुरू होने वाली ECC में 5 प्रतिशत सालाना बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भी मंज़ूरी दी। इस बात पर ज़ोर दिया कि गैर-ज़रूरी कमर्शियल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश करने से बचना चाहिए और इसके बजाय पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का उपयोग करना चाहिए।

कोर्ट ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा,”दिल्ली में डीज़ल कमर्शियल वाहनों के प्रवेश को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से, और महंगाई, वाहनों के संचालन की लागत में वृद्धि, तथा NHAI टोल दरों में सालाना बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए आयोग सिफारिश करता है कि ECC दरों में हर साल 1 अप्रैल से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए। इस तरह के संशोधन को GNCTD द्वारा अधिसूचित किया जाए।”

1985 के एमसी मेहता मामले से उत्पन्न इन कार्यवाहियों का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाना और दिल्ली में कमर्शियल वाहनों के प्रवेश को विनियमित करना रहा है। कोर्ट इस क्षेत्र में बिगड़ती वायु गुणवत्ता की समस्या से निपटने के लिए पर्यावरण मुआवजा शुल्क, भारी वाहनों को पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के माध्यम से मोड़ने, और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग, दिल्ली नगर निगम, तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण जैसी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने जैसे उपायों की निगरानी कर रहा है।

‘सुनवाई समाप्त होने तक कोर्ट में मौजूद रहें’, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बस्ती एसपी को लगाई फटकार, जानें पूरा प्रकरण

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले हफ्ते बस्ती के एसपी डॉ. यशवीर सिंह को सुनवाई होने तक कोर्ट में मौजूद रहने का आदेश दिया। कारण यह था कि उन्होंने एक हत्या के मामले में अपने व्यक्तिगत हलफनामे में गलत तथ्य पेश किए थे। जिसको लेकर कोर्ट ने उन्हें भविष्य में सावधान रहने की चेतावनी भी दी। पढ़ें पूरी खबर।