सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें ‘बाबर’ या ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर मस्जिद निर्माण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इस याचिका में कहा गया था कि देशभर में किसी भी मस्जिद का निर्माण या नाम ‘बाबर’ ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर नहीं होना चाहिए। याचिका में तर्क दिया गया था कि मुगल शासक बाबर ‘हिंदू विरोधी आक्रमणकारी’ था। इसलिए उसके नाम पर किसी भी धार्मिक ढांचे की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता देवकीनंदन पांडे की कुछ दलीलें सुनने के बाद ही पीठ ने इस मामले को खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि मुशिर्दाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ नाम से एक मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने तर्क किया कि बाबर एक क्रूर और हिंदू-विरोधी आक्रमणकारी था। इसलिए उसके नाम पर किसी भी मस्जिद का निर्माण या नामकरण नहीं होना चाहिए।

इस याचिका में यह भी कहा गया कि बाबर ने हिंदुओं को गुलाम कहा था। और इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। याचिका में केंद्र, राज्यों और अन्य सरकारों को याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करने और समूचे भारत में बाबर या बाबरी मस्जिद या उनसे मिलते-जुलते/व्युत्पन्न नामों पर किसी भी मस्जिद या धार्मिक संरचना के निर्माण, स्थापना या नामकरण पर रोक लगाने या प्रतिबंध लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। 

हालांकि अदालत ने इस दलील पर कोई राहत देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने इस विषय पर किसी व्यापक देशव्यापी रोक लगाने से इनकार किया।

गौर करने वाली बात है कि हुमायूं कबीर ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की योजना की घोषणा की थी। इसके बाद यह मुद्दा विवादों में आ गया था।