सुप्रीम कोर्ट ने CISF के एक कर्मचारी को 11 दिन की गैरहाजिरी के आधार पर नौकरी से हटाने पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार पर जुर्माना लगाते हुए याचिका भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इतनी छोटी अवधि की अनुपस्थिति के लिए बर्खास्तगी का फैसला उचित नहीं है।
‘बर्खास्तगी की सचा उचित नहीं’
सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि 11 दिन की गैरहाजिरी के लिए नौकरी से हटाना बहुत कड़ा कदम है। अदालत ने साफ कहा कि यह सजा मामले के हिसाब से उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने कर्मचारी को राहत दी थी और उसमें दखल देने की कोई जरूरत नहीं है। पीठ ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के आदेश में कोई कमी नजर नहीं आती।
केंद्र सरकार से सवाल- क्यों आए सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि ऐसे मामले में सुप्रीम कोर्ट आने की क्या जरूरत थी? न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यह समझ से बाहर है कि केंद्र सरकार यह मामला सर्वोच्च अदालत तक क्यों लाई।
25 हजार रुपये का जुर्माना
फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों से अदालतों पर अनावश्यक बोझ बढ़ता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने लंबित मामलों के बढ़ते बोझ पर भी चिंता जताई। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि अदालतें लगातार पेंडेंसी को लेकर चेतावनी देती रही हैं लेकिन इसके बावजूद ऐसे मामले लाए जा रहे हैं।
SCBA सम्मेलन का भी जिक्र
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने हाल ही में हुए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस प्लेटफॉर्म पर भी सरकार को गैर-जरूरी मुकदमेबाजी से बचने की सलाह दी गई थी। उन्होंने कहा कि वह सम्मेलन केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि गंभीर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था।
