केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय विधि मंत्रालय ने सोमवार को इस संबंध में अधिसूचनाएं जारी कर दीं।

नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना, बंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति शील नागू, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली शामिल हैं।

इन नियुक्तियों की सिफारिश हाल ही में उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने की थी। केंद्र सरकार की मंजूरी और विधि मंत्रालय की अधिसूचना के बाद अब ये सभी न्यायाधीश देश की सर्वोच्च अदालत में अपनी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।

आपको बता दें कि हाल ही में उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाई गई है। इसी क्रम में न्यायपालिका में लंबित मामलों के निस्तारण और न्यायिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इन नई नियुक्तियों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गौर करने वाली बात है कि वी. मोहना बार से सीधे सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने वाली ग्यारहवीं व्यक्ति होंगी। रिटायर्ड जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह दूसरी महिला भी होंगी। वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से प्रैक्टिस कर रही हैं। वह भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (परमानेंट कमीशन) देने से जुड़े ऐतिहासिक मामले में पक्ष रखने वाले प्रमुख वकीलों में शामिल रही हैं।

कौन हैं जस्टिस शील नागू?

जस्टिस शील नागू वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। उनका मूल न्यायिक कार्यक्षेत्र मध्य प्रदेश हाई कोर्ट रहा है। वह हाल ही में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा से जुड़े नकदी विवाद मामले की जांच के लिए गठित इन-हाउस समिति के सदस्य भी रहे हैं।

जस्टिस श्री चंद्रशेखर और अन्य नियुक्तियां

न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर वर्तमान में बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश हैं। इससे पहले उनका संबंध झारखंड हाई कोर्ट से रहा है। वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा मूल रूप से दिल्ली हाई कोर्ट से आते हैं।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण पल्ली पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से जुड़े रहे हैं। वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद गठित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की स्थापना से लेकर अब तक उन्होंने न्यायालय का नेतृत्व किया है।

इन सभी न्यायविदों को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किए जाने के बाद देश की सर्वोच्च अदालत को न्यायिक अनुभव और विविध पृष्ठभूमि का लाभ मिलेगा।

समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ