एअर इंडिया द्वारा अपनी ‘महाराजा स्कॉलर स्कीम’ का लाभ नहीं देने पर राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाया है। आयोग ने एअर इंडिया को कुल 74131 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

यह मामला जयपुर निवासी लावण्या मैगन से जुड़ा है। साल 2021 में एयर इंडिया ने उनसे अतिरिक्त सामान (एक्सेस बैगेज) के नाम पर 34131 रुपये वसूल लिए थे। बाद में एअर इंडिया ने स्वयं स्वीकार किया कि छात्रा इस योजना के तहत छूट पाने की पात्र थी लेकिन इसके बावजूद उसे साालो तक रिफंड के लिए इंतजार करना पड़ा।

न्यायिक सदस्य मुकेश और सदस्य दिनेश कुमार की पीठ ने लावण्या की अपील पर सुनवाई की। यह अपील फरवरी 2024 में जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा दिए गए आदेश में मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर दायर की गई थी।

आयोग ने 29 मई को दिए अपने आदेश में कहा कि छात्रा को अनावश्यक मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी और अपने पैसे वापस पाने के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। इससे उसका कीमती समय भी बर्बाद हुआ।

आयोग ने 29 मई को दिए आदेश में कहा, ”मामले की परिस्थितियां स्पष्ट करती हैं कि शिकायतकर्ता एक छात्रा है जिसे बेवजह मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। मुकदमेबाजी में उसका बेहद कीमत समय नष्ट हुआ। इसलिए उसकी मानसिक पीड़ा पूरी तरह उचित और न्यायोचित है।” इसके साथ ही आयोग ने एअर इंडिया को छात्रा को बकाया राशि और मुआवजे सहित कुल 74131 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।

छात्रा के सामान भत्ते को लेकर विवाद

यह मामला एअर इंडिया की ‘महाराजा स्कॉलर स्कीम’ से जुड़ा है। इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यात्रा करने वाले छात्रों को विशेष सामान (बैगेज) भत्ता देने का प्रावधान था।

लावण्या मैगन यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) में पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने लंदन से भारत आने के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट AI-162 का टिकट बुक किया था।

अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि 21 जुलाई 2021 को फ्लाइट के लिए चेक-इन के दौरान एअर इंडिया ने उन्हें छात्र बैगेज योजना (student baggage scheme) का लाभ देने से इनकार कर दिया। इसके बाद एयरलाइन ने अतिरिक्त सामान (एक्सेस बैगेज) शुल्क के रूप में उनसे 350 ब्रिटिश पाउंड (GBP) वसूल लिए जो उस समय लगभग 34131 रुपये के बराबर थे। अतिरिक्त सामान शुल्क के रूप में यह राशि वसूली गई थी।

लावण्या मैगन का मानना था कि यह शुल्क अनुचित और नियमों के खिलाफ था। इसलिए उन्होंने इस राशि को वापस पाने के लिए तुरंत एअर इंडिया से रिफंड की मांग शुरू कर दी। उनका कहना था कि छात्रा होने के कारण उन्हें महाराजा स्कॉलर स्कीम का लाभ मिलना चाहिए था और अतिरिक्त सामान शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए था।

एयरलाइन ने शुरुआत में रिफंड देने से किया इनकार

शुरुआत में एअर इंडिया ने लावण्या मैगन की रिफंड मांग खारिज कर दी। एयरलाइन का कहना था कि उनके शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि और कोर्स पूरा होने की तारीख के आधार पर वह महाराजा स्कॉलर स्कीम की शर्तों के तहत पात्र नहीं थीं।

हालांकि, लावण्या ने इस दावे का विरोध करते हुए बताया कि उन्होंने एक विशेष शैक्षणिक व्यवस्था के तहत अपना कोर्स पूरा किया था। इसके कारण चार साल का पाठ्यक्रम केवल तीन साल में पूरा किया जा सका।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा पढ़ाई पूरी होने के संबंध में थी, ना कि जाने के लिए। इन सभी स्पष्टीकरणों के बावजूद एअर इंडिया ने उन्हें रिफंड नहीं दिया और धनवापसी की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

बाद में एअर इंडिया ने माना कि छात्रा को पात्र

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि कई बार पत्राचार और बातचीत के बाद आखिरकार एअर इंडिया ने खुद स्वीकार कर लिया कि लावण्या मैगन महाराजा स्कॉलर स्कीम के तहत अतिरिक्त सामान ले जाने की पात्र थीं।

26 सितंबर 2021 को एयरलाइन ने माना कि लावण्या को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए था और रिफंड की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।

इसके दो दिन बाद एअर इंडिया ने रिफंड जारी करने के लिए उनसे क्रेडिट कार्ड की जानकारी और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे। लावण्या ने सभी आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी। लेकिन पात्रता स्वीकार करने और सभी जरूरी डिटेल्स लेने के बावजूद एयरलाइन ने उन्हें रकम वापस नहीं की। बार-बार कोशिश करने के बाद भी जब रिफंड नहीं मिला तो मजबूर होकर छात्रा को न्याय के लिए कंज्यूमर फोरम का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

जिला उपभोक्ता आयोग ने छात्रा के पक्ष में दिया फैसला

15 फरवरी 2024 को जिला उपभोक्ता आयोग ने लावण्या मैगन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए एअर इंडिया को 34131 रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया।

इसके अलावा आयोग ने मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए 4000 रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 3000 रुपये देने का भी निर्देश दिया।

हालांकि, लावण्या इस मुआवजे की राशि से संतुष्ट नहीं थीं। उनका कहना था कि रिफंड पाने के लिए उन्हें कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा, बार-बार एयरलाइन से संपर्क करना पड़ा और कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

इसी वजह से उन्होंने मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग करते हुए उच्च उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की। उनका तर्क था कि उन्हें दी गई मुआवजा राशि उनकी मानसिक परेशानी और लंबे संघर्ष की तुलना में बहुत कम थी।

राज्य आयोग ने मुआवजा बढ़ाया

राज्य उपभोक्ता आयोग ने लावण्या मैगन की दलील से सहमति जताई और कहा कि एअर इंडिया ने जुलाई से अक्टूबर 2021 के बीच शिकायतकर्ता के साथ कई ईमेलों का आदान-प्रदान किया था।

आयोग ने यह भी माना कि एयर इंडिया ने अंततः स्वीकार कर लिया था कि छात्रा महाराजा स्कॉलर स्कीम के तहत लाभ पाने की पात्र थी। इसके बावजूद उसे रिफंड की राशि नहीं दी गई। आयोग ने पाया कि एक छात्रा को बिना वजह मानसिक तनाव झेलना पड़ा और अपने वैध हक को पाने के लिए उसका कीमती समय भी बर्बाद हुआ।

राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उपभोक्ता विवादों में दिए गए सिद्धांतों का हवाला दिया। आयोग ने कहा कि मुआवजा केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए नहीं होता बल्कि इसका मकसद सेवा में कमी के कारण हुए मानसिक कष्ट, असुविधा और उत्पीड़न की भरपाई करना भी होता है।

आयोग ने माना कि जिला आयोग द्वारा दिया गया 4000 रुपये का मुआवजा मामले की परिस्थितियों के अनुसार बहुत कम था। आयोग ने यह भी कहा कि छात्रा को बेफिजूल ही परेशान किया गया और उसे लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा जबकि एयर इंडिया स्वयं उसकी पात्रता पहले ही स्वीकार कर चुका था।

मुआवजे में सात गुना से ज्यादा वृद्धि

अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए राज्य आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा 4000 से बढ़ाकर 30000 रुपये कर दिया।

इसके अलावा मुकदमेबाजी खर्च को भी 3000 रुपये से बढ़ाकर 10000 रुपये कर दिया गया। हालांकि, 34131 रुपये की मूल राशि (अतिरिक्त सामान शुल्क की वापसी) को यथावत रखा गया।

अंतिम आदेश
राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग ने जिला आयोग के आदेश में संशोधन करते हुए एअर इंडिया को निर्देश दिया कि वह छात्रा को कुल 74131 रुपये का भुगतान करे जिसमें शामिल हैं:
34131 रुपये – अतिरिक्त बैगेज शुल्क की वापसी
30000 रुपये – मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजा
10000 रुपये – मुकदमेबाजी खर्च

आयोग ने निष्कर्ष में कहा कि एयरलाइन ने स्वयं छात्रा की पात्रता स्वीकार करने के बावजूद रिफंड प्रक्रिया पूरी नहीं की जिसके कारण उसे सालों तक अनावश्यक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और गंभीर मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।