गोवा के एक सत्र न्यायालय (Sessions Court) ने उत्तरी गोवा के अरपोरा में स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के प्रबंधकों राजीव मोदक और बिजय कुमार सिंह को जमानत दे दी। इस नाइट क्लब में दिसंबर 2025 में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश 1 अप्रैल को नाइटक्लब मालिकों सौरभ और गौरव लूथरा को जमानत देने के बाद आया है। इस घटनाक्रम के साथ मामले में नामजद सभी प्रमुख आरोपियों को जमानत मिल गई है। एक आरोपी अभी भी फरार है।
लूथरा बंधुओं को 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई थी। जिसमें कुछ शर्तें शामिल थीं। जैसे कि वे सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे या गवाहों को प्रभावित नहीं करेंगे और अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे। मोदक और सिंह पर भी इसी तरह की शर्तें लागू होने की उम्मीद है।
यह मामला 6 दिसंबर, 2025 की रात को नाइट क्लब में एक कार्यक्रम के दौरान लगी आग से संबंधित है। पुलिस ने आरोप लगाया है कि प्रतिष्ठान आवश्यक लाइसेंस और सुरक्षा मंजूरी के बिना संचालित हो रहा था और कार्यक्रम स्थल पर आयोजित अग्नि प्रदर्शन में पर्याप्त सुरक्षा सावधानियों का अभाव था।
जांचकर्ताओं ने अग्नि सुरक्षा अवसंरचना के रखरखाव में कथित खामियों की ओर भी इशारा किया है। जिसके लिए मालिकों, प्रबंधन और आयोजनकर्ताओं को दोषी ठहराया गया है।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिसमें गैर इरादतन हत्या, जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य और आग के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण शामिल हैं।
घटना के कुछ घंटों बाद ही लूथरा बंधुओं ने पहले थाईलैंड भागने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में उन्हें निर्वासित कर गिरफ्तार कर लिया गया। समानांतर कार्यवाही (Parallel Proceedings) जारी है। जिसमें लाइसेंस प्राप्त करने के लिए जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाने वाली एक अलग एफआईआर भी शामिल है, क्योंकि गोवा की सबसे घातक नाइटक्लब त्रासदियों में से एक के कारणों की नियामक और आपराधिक जांच जारी है।
दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में देश के सबसे पुराने लंबित आपराधिक मामलों में से एक में सभी जीवित आरोपियों को बरी कर दिया है। इस मामले को करीब तीन दशक पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर राष्ट्रपति भवन के दस्तावेजों को कथित तौर पर जाली बनाने के आरोप में शुरू किया गया था। पढ़ें पूरी खबर।
