पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक पूर्व सैनिक की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आरोप है कि वह पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसियों से संपर्क में था और पैसे के बदले सेना की गतिविधियों के बारे में गोपनीय जानकारी साझा करता था। हाई कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना है।
जस्टिस मनीषा बटरा ने कहा कि याचिकाकर्ता पर पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में रहने का आरोप है।
6 अगस्त के आदेश में हाई कोर्ट ने कहा गया, “जांच के दौरान यह पाया गया है कि याचिकाकर्ता फोन पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में था। उसके खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं। जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री की प्रकृति और इसमें शामिल व्यापक जनहित को देखते हुए, न्यायालय इस स्तर पर याचिकाकर्ता को नियमित जमानत देने के लिए इसे उपयुक्त मामला नहीं मानता है।”
आरोप- संवेदनशील जानकारी एकत्रित की
आरोपों के अनुसार, एक गुप्त मुखबिर ने अमृतसर स्थित स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल को बताया कि बीकानेर स्थित एयर फोर्स स्टेशन में डिफेंस सर्विस कॉर्प्स के साथ तैनात एक पूर्व सैनिक कथित तौर पर सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के संपर्क में था।
आरोप है कि वह भारतीय सेना में अपने पुराने संपर्कों का इस्तेमाल करके सेना की गतिविधियों से जुड़ी बेहद गोपनीय जानकारी जुटाता था। वह देश की सुरक्षा, एकता और अखंड़ता से जुड़ी अन्य संवेदनशील जानकारी पैसे के बदले पाकिस्तान भेज रहा था।
यह भी आरोप लगाया गया कि घटना वाले दिन उसे अमृतसर कैंटोनमेंट क्षेत्र में सेना की बढ़ी हुई गतिविधियों के संबंध में जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया था। गुप्त सूचना के आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और जांच शुरू की गई। जिसके बाद उसे 7 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। जांच अब पूरी हो चुकी है।
झूठे आरोप में फंसाया गया- पूर्व सैनिक का वकील
पूर्व सैनिक की ओर से पेश हुए अधिवक्ता कुलजीत सिंह बाल ने तर्क दिया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और वे एक पूर्व सैनिक हैं जिन्होंने भारतीय सेना में लगभग 17 वर्षों तक बेदाग सेवा रिकॉर्ड के साथ सेवा की है।
यह तर्क दिया गया कि उसे किसी प्रतिबंधित या संवेदनशील सैन्य क्षेत्र से नहीं पकड़ा गया था, बल्कि एक विवाह समारोह से अवैध रूप से उठाया गया था। एफआईआर में लगाए गए आरोप अस्पष्ट और सामान्य प्रकृति के हैं। इनमें कथित गोपनीय जानकारी की विशिष्ट प्रकृति, संचरण का सटीक तरीका या किसी विदेशी एजेंसी के साथ संचार का कोई ठोस उदाहरण नहीं दिया गया है।
वकील ने आगे तर्क दिया कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि उसने कभी किसी व्यक्ति को कोई गुप्त सूचना भेजी हो। वकील ने कहा कि 3,000 रुपये प्राप्त करने का आरोप निराधार था क्योंकि यह राशि उसे किसी अन्य परिचित व्यक्ति से मिली थी, न कि कथित सूचना भेजने वाले से।
यह बताया गया कि जांच पहले ही पूरी हो चुकी है। चालान पेश किया जा चुका है और याचिकाकर्ता 7 जुलाई से हिरासत में है। वकील ने निवेदन किया कि हिरासत में पूछताछ की अब कोई जरूरत नहीं है और निरंतर हिरासत से कोई लाभ नहीं होगा। अतः यह निवेदन किया गया कि जमानत याचिका स्वीकार की जानी चाहिए।
अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल साक्षी बख्शी ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ गंभीर और विशिष्ट आरोप हैं और जांच के दौरान यह पाया गया कि वह पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसियों के लगातार संपर्क में था। उन्होंने कहा कि आरोपों की गंभीरता और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके प्रभाव को देखते हुए पूर्व सैनिक नियमित जमानत की रियायत का हकदार नहीं है और उन्होंने याचिका खारिज करने की मांग की।
कोर्ट ने नहीं दी जमानत
अदालत ने कहा कि पूर्व सैनिक पर आरोप है कि उसने विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के माध्यम से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों से संपर्क किया। भारतीय सेना में अपनी पूर्व की सेवा और संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए उसने सेना गतिविधियों, युद्ध की तैयारियों और सैन्य संरचनाओं से संबंधित गोपनीय जानकारी कथित तौर पर हासिल की और उसे पाकिस्तान भेजा।
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उसकी नियमित जमानत याचिता खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि आदेश में की गई कोई टिप्पणी मामले के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं मानी जाएगी और निचली अदालत स्वतंत्र रूप से मामले की सुनवाई करेगा।
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