अरावली के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह पहले विशेषज्ञों की राय लेगा कि क्या अरावली इलाके में माइनिंग की परमिशन दी जा सकती है और यदि हां, तो किस हद तक। टॉप कोर्ट ने कहा कि अभी फिलहाल सभी लाइसेंस वाली माइनिंग एक्टिनिटीज पर यथास्थिति जारी रहेगी।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ अरावली पहाड़ी की परिभाषा में हालिया बदलाव से अनरेगुलेटेड माइनिंग और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की चिंताओं पर शुरू किए गए स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।

क्षेत्र में कोर्ट द्वारा माइनिंग पर लगाई गई रोक के मुद्दे पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा, “पहले एक्सपर्ट्स हमें बताएं कि माइनिंग की इजाजत दी जा सकती है या नहीं। यदि इसकी परमिशन दी जा सकती है, तो वो किस हद तक दी सकती है। साथ ही इसकी मॉनिटरिंग कौन करेगा? हम एक-एक करके सभी पहलुओं पर विचार करेंगे।”

न्यायालय ने पाया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की राय ‘अरावली’ शब्द को परिभाषित करने, इसके कुल क्षेत्रफल, पर्वत श्रंखलाओं, वन आवरण को परिभाषित करने और अरावली के उन हिस्सों की पहचान करने में सहायक होगी, जहां सदियों से शहर, कस्बे और गांव विकसित हो चुके हैं।

कोर्ट ने मंत्रालय से संबंधित क्षेत्र के एक्सपर्ट्स एक पैनल और उनकी प्रोफाइल प्रस्तुत करने के लिए कहा। न्यायालय ने मामले में उपस्थित अधिवक्ताओं से भी समिति के गठन हेतु नामी एक्सपर्ट्स का नाम सुझाने के लिए कहा। जैसा कि उसके 29 दिसंबर, 2025 के ऑर्डर में बताया गया था।

उस ऑर्डर में कोर्ट ने संकेत किया था कि वह रिपोर्ट का पूरी तरह से आकलन करने और ‘अरावली हिल्स’ और ‘अरावली रेंज’ की परिभाषा, 100 मीटर की ऊंचाई की सीमा का असर, और क्या पहाड़ियों के बीच 500 मीटर के गैप में इकोलॉजिकल कंटिन्यूटी से समझौता किए बिना रेगुलेटेड माइनिंग की इजाज़त दी जा सकती है, जैसे मुद्दों की जांच करने के लिए एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाएगा।

कोर्ट ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी बनने के बाद जब तक शुरुआती मुद्दों को असरदार तरीके से हल नहीं कर लिया जाता, तब तक माइनिंग पर रोक जारी रहनी चाहिए।

कोर्ट ने कहा, “हमें पता है कि सभी एक्टिविटी, खासकर माइनिंग, जिनके लिए लाइसेंस/लीज़ वगैरह और ज़रूरी परमिशन दी गईं, रुक गईं। हालांकि, कमेटी बनने के बाद कुछ शुरुआती मुद्दों का असरदार तरीके से जवाब मिलने तक अभी के लिए ऐसा स्टेटस को बनाए रखना होगा।”

एमिक्स क्यूरी सीनियर एडवोकेट के परमेश्वर ने मामले में उठने वाले संभावित मुद्दों पर एक डिटेल्ड नोट भेजा। कोर्ट ने पार्टियों और इंटरवीनर के वकीलों को इस मुद्दे पर अपने-अपने नोट जमा करने के लिए 10 मार्च तक का समय दिया। कोर्ट ने एडवोकेट जय चीमा से डोमेन एक्सपर्ट के तौर पर कोर्ट की मदद करने का भी अनुरोध किया। मामले को अब कमेटी बनाने और मामले में उठने वाले मुद्दों को तय करने के मकसद से सूचीबद्ध किया जाएगा।

अजित पवार की मौत का मामला बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा

बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में 28 जनवरी को बारामती में हुए विमान हादसे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। इस हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य पांच लोगों की मौत हो गई थी। पूरी खबर पढ़ें।