सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को धर्म के नाम पर पशु बलि पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय को नोटिस जारी किया। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा और मामले को एक महीने बाद के लिए सूचीबद्ध किया। कोर्ट ने आदेश दिया, “नोटिस जारी करें, जिसका जवाब 4 सप्ताह में देना होगा।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील श्रुति बिष्ट द्वारा दायर जनहित याचिका में मंदिरों में जानवरों की बलि के खिलाफ सरकारी निष्क्रियता का आरोप लगाया गया है। याचिका में मूलतः पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 28 में संशोधन और धर्म के नाम पर पशुओं की हत्या पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश मांगा गया है। अधिनियम की धारा 28 में कहा गया है कि धर्म के अनुसार किसी पशु की हत्या करना अपराध नहीं है।

इस प्रावधान के विरुद्ध निर्देश मांगते हुए बिष्ट ने धार्मिक समारोहों के दौरान वध किए जाने वाले जानवरों की रक्षा के लिए कानून बनाने की प्रार्थना की है। जनहित याचिका में कहा गया है कि मंदिरों में पशु बलि में शुरुआती गिरावट के बावजूद, यह प्रथा बाद के काल में हिंदू धर्म में वापस आ गई क्योंकि यह स्वदेशी संस्कृतियों के साथ समाहित हो गई थी।

याचिका में कहा गया, “वर्तमान में बाली, इंडोनेशिया, नेपाल और भारत के हिमालयी क्षेत्र, उत्तरपूर्वी भारत, ओडिशा और बंगाल के कुछ हिस्से, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत जैसे क्षेत्रों में अभी भी पशु बलि की प्रथा प्रचलित है। आमतौर पर, युवा नर पशुओं को बलि के लिए चुना जाता है। कुछ अपवादों में लोग अपने बच्चों या स्वयं को भी बलि के रूप में अर्पित करते हैं। हालांकि, योद्धाओं के लिए विजय सुनिश्चित करने के लिए मां दुर्गा को स्वयं को अर्पित करना एक आम प्रथा थी।”

इस जनहित याचिका में इस प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की मांग की गई है। जिसमें मजबूत विधायी उपाय, जन जागरूकता अभियान और गैर सरकारी संगठनों के साथ सहयोग शामिल है।

इसमें तर्क दिया गया है, “पशुओं की हत्या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। पूर्व के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना है कि प्रत्येक प्रजाति को जीने का अधिकार है। अनुच्छेद 21 मानव के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, और चूंकि ‘जीवन’ शब्द को विभिन्न तरीकों से परिभाषित किया गया है, और चूंकि जीवन केवल मानव तक सीमित नहीं है, इसलिए पशुओं का जीवन भी इस संरक्षण के अंतर्गत आता है। अतः न्याय के हित में यह आवश्यक है कि पशुओं को हत्याओं से बचाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की वॉर मेमोरियल के खिलाफ याचिका

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक याचिकाकर्ता द्वारा दायर की गई देहरादून में वॉर मेमोरियल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि ड्यूटी के दौरान शहीद हुए लोगों का सम्मान करें। पढ़ें पूरी खबर।