NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसके बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च रद्द कर दिया। वहीं, शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। इसके बाद अब केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास का भी बयान सामने आया है।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि मैंने और केंद्र सरकार में मेरे साथी डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट को लेकर छात्रों के प्रतिनिधियों से वार्ता की थी। जिसमें भारत सरकार की ओर से हमने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए आश्वासन दिया था कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
जेपी नड्डा ने कहा कि उसी क्रम में, हमने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों की सरकारों से भी बात की है और अब हम उस आश्वासन को पूरा करने जा रहे हैं। सीजेपी के प्रवक्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके 5 सितंबर को प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को वापस लेने का जो निर्णय लिया है। हम उसका स्वागत करते हैं। सरकार के लिए युवीओं की तरक्की और उनका विकास ही हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि एफिडेविट में लिखा है, सारे स्टेट ने लिखा है और कोर्ट ने उसको रिकॉर्ड में भी लिया है कि भविष्य में भी किसी प्रदर्शनकारी, युवा, स्टूडेंट के खिलाफ कोई एक्शन और FIE नहीं होगा, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट को लेकर।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा चेहरे की पहचान तकनीक के आधार पर यह आशंका जताई गई थी कि विरोध स्थल पर लगभग 2,800 कथित कुख्यात अपराधी मौजूद थे। इस संबंध में हमने सरकार के साथ बातचीत के दौरान तर्क दिया कि यदि ये 2,800 कुख्यात अपराधी वास्तव में मौजूद थे, तो पहला सवाल यह है कि वे समाज में खुलेआम क्यों घूम रहे थे। दूसरा, यदि उन्होंने विरोध स्थल पर बलात्कार, हत्या या अन्य गंभीर अपराध जैसे जघन्य अपराध किए हैं, तो उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए, उनकी जांच की जानी चाहिए और उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए।
दास ने आगे कहा कि इसलिए सर्वोच्च न्यायालय ने लगभग 2,800 चिन्हित कुख्यात अपराधियों की जांच के लिए दिल्ली में एक अलग नई एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। तो इस तरह वो मामाल भी सुलझ गया। उन्होंने कहा कि हमने सरकार से सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह बताने का आग्रह किया कि उचित राशि में मुआवजा 90 दिनों के भीतर दिया जाएगा। धनराशि सीधे पीड़ितों के बैंक खातों में जमा की जाएगी। सरकार ने आज सर्वोच्च न्यायालय को यह आश्वासन दिया और न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए न्यायिक स्वीकृति प्रदान की। इसे अपनी व्यवस्था में शामिल करके पवित्रता प्रदान करना।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ आज?
शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान सीजेपी ने जहां अपना 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च रद्द कर दिया तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया।
अदालत के इस फैसले के बाद दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ दर्ज प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द होंगी। हालांकि, दिल्ली पुलिस 2873 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR जारी रखेगी क्योंकि इन लोगों पर प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल होने के आरोप हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पेपर लीक के खिलाफ धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के चलते प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं होगी।
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास के मार्च वापस लेने की घोषणा के बाद CJI ने इस कदम की सराहना की।
5 सितंबर का मार्च वापस
सौरव दास ने पार्टी का बयान पढ़ते हुए कहा, ”CJP के को-कन्वीनर के तौर पर मैं कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासन, आज की न्यायिक प्रक्रिया और इस अदालत के आदेश को देखते हुए CJP ने 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च को वापस लेने का फैसला किया है। हम आज के आदेश का पालन करने की उम्मीद करते हैं। इस फैसले के लिए हम अदालत और दोनों पक्षों के वकीलों के साथ-साथ सॉलिसिटर जनरल के प्रयासों के लिए भी धन्यवाद देते हैं।”
सीजेआई सूर्यकांत ने की सराहना
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा दिखाएं तो सभी मुद्दों को एक-एक करके सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है जिस पर खुले दिमाग से बातचीत करके समाधान न निकाला जा सके।
एसजी तुषार मेहता ने कहा, ”मैं पूरी ईमानदारी से कहूंगा कि उनका रुख भी काफी रचनात्मक और सकारात्मक रहा है। हमारी तरफ से भी पूरी तरह रचनात्मक और सकारात्मक रवैया रहा। हम एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।”
चार राज्यों ने FIR रद्द करने की मांग की
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान तीन बातों पर भरोसा दिया गया था- जिन छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज हुई हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा, आगे कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी और प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों में मुआवजा दिया जाएगा।
‘अभी हालात बिगड़ने की कोई वजह नहीं’
सोमवार को कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह नहीं है जिसके आधार पर यह माना जाए कि सीजेपी के मार्च से कोई अप्रिय घटना हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर 5 सितंबर को लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के बाद तक रोकने की मांग की गई थी।
याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मौजूदा स्थिति में मार्च से किसी अप्रिय घटना की आशंका मानने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश रिटायर्ड पुलिस अधिकारी के वकील डॉ. रिजवान ने कहा कि प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है। लेकिन किसी मार्च या प्रदर्शन के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।
देश की राजनीति में नए प्रयोगों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी पहली राष्ट्रीय कार्यसमिति का औपचारिक ऐलान कर दिया है। पार्टी ने 13 सदस्यीय राष्ट्रीय नेतृत्व टीम की घोषणा करते हुए आने वाले छह महीनों में पूरे देश में संगठन विस्तार की योजना भी शेयर की है। पढ़ें पूरी खबर।
