तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी को बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट से झटका लगा है। हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जानी की अनुमति नहीं दी है। इसी के साथ कोर्ट ने बनर्जी की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

जस्टिस सौगता भट्टाचार्य ने प्रारंभ में यह प्रस्ताव दिया था कि बनर्जी की आंखों की स्थिति का आकलन एसएसकेएम अस्पताल में एक मेडिकल बोर्ड द्वारा किया जाए, ताकि यह जांच की जा सके कि बनर्जी की आंखों का इलाज क्या भारत में किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि बनर्जी द्वारा उपचार के विकल्प का मूल्यांकन इस तथ्य के आलोक में किया जाना चाहिए कि वह कई आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं जिनमें जांच चल रही है।

अदालत ने क्या कहा?

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि वह भारत में अभिषेक बनर्जी की आंखों की स्थिति का आकलन किए बिना उन्हें विदेश यात्रा की अनुमति देने के लिए इच्छुक नहीं है, ताकि यह देखा जा सके कि विदेश यात्रा आवश्यक है या नहीं। चूंकि बनर्जी भारत में इस तरह का मूल्यांकन कराने के इच्छुक नहीं थे, इसलिए न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज करने का फैसला किया।

अदालत ने कहा कि आवेदक के वकील द्वारा यह निवेदन करने पर कि वे इस न्यायालय के निर्देशानुसार चिकित्सा बोर्ड के समक्ष उपस्थित नहीं होंगे। न्यायालय यह पाता है कि आवेदन दाखिल करके उठाया गया मुद्दा आगे लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। अतः, यह आवेदन खारिज किया जाता है।

बनर्जी के खिलाफ दर्ज है कई FIR

अभिषेक बनर्जी की विदेश यात्रा की अनुमति के लिए याचिका ऐसे समय में आई है जब भाजपा द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करने और 4 मई को राज्य में सत्ता में आने के बाद बनर्जी के खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।

अन्य मामलों के अलावा, बनर्जी के खिलाफ चुनाव प्रचार के दौरान कथित तौर पर भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप में भी एफआईआर दर्ज हैं। बनर्जी ने इन मामलों को रद्द करने के लिए याचिकाएं दायर की हैं और इनमें से कई मामलों में अंतरिम सुरक्षा प्राप्त कर ली है ।

चुनाव भाषण से जुड़े एक मामले में अंतरिम राहत की शर्त के तौर पर अभिषेक बनर्जी को उच्च न्यायालय की अनुमति के बिना देश छोड़ने से मना किया गया था। बाद में बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी।

पिछले महीने, हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को विदेश यात्रा की तत्काल अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी अनुमति तभी दी जाएगी जब एसएसकेएम अस्पताल यह पुष्टि कर देगा कि कोलकाता में आंखों का इलाज संभव नहीं है। बाद में बनर्जी ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की। ​​3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम फैसला हाई कोर्ट पर छोड़ दिया जाए और उसे एक सप्ताह के भीतर मामले का फैसला करने को कहा।

बनर्जी की तरफ से क्या कहा गया?

बनर्जी का प्रतिनिधित्व कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने बताया कि वे केवल चिकित्सा कारणों से सीमित समय के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजनयिक पासपोर्ट धारक सांसद होने के नाते उनकी गतिविधियों पर हमेशा नजर रखी जाती है। उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार यहीं रहता है और वे कई बार विदेश यात्रा करके भारत लौट चुके हैं। उन्होंने अदालत से इस बार भी उन्हें इस तरह की यात्रा की अनुमति देने का आग्रह किया और कहा कि कड़ी शर्तें लगाई जा सकती हैं।

हालांकि, अदालत ने सवाल उठाया कि क्या यह बिल्कुल जरूरी है कि बनर्जी का आंखों का इलाज केवल विदेश में ही कराया जाए। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि एक और पहलू है। अगर यह इलाज भारत में ही हो सकता है, तो विदेश जाने की कोई ज़रूरत नहीं है। मैं एसएसकेएम के नेत्र रोग विभाग को निर्देश दूंगा कि तीन सदस्यीय समिति बनर्जी की जांच करे और रिपोर्ट दे। क्या आप एसएसकेएम बोर्ड के सामने पेश होने के लिए तैयार हैं या नहीं? अगर इलाज बहुत ज़रूरी है, तो यह हमारे देश में भी हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में ऐसा नहीं है कि हम (भारत) पीछे हैं। हम भी चिकित्सा विज्ञान में प्रगति कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का इलाज हमारे देश में ही हो रहा है।”

जॉन ने जवाब देते हुए कहा कि टीएमसी नेता लगातार विदेश के एक अस्पताल (जॉन हॉपकिंस) में इलाज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बनर्जी की आंखों के इलाज के लिए अस्पताल जाना उनकी निजी पसंद है और नियमित इलाज हमेशा ही उचित होता है। उन्होंने जॉन हॉपकिंस की एक रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें बनर्जी को पहले दिए गए इलाजों का विवरण था।

उन्होंने आगे बताया कि बनर्जी को पहले भारत में हुए एक इलाज के दौरान आँखों की समस्या हो गई थी, क्योंकि इलाज ठीक से नहीं हुआ था। जॉन ने निर्देशानुसार कहा कि यदि न्यायालय बनर्जी को आँखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति नहीं देता है, तो उनका आवेदन खारिज किया जा सकता है।

राज्य ने किया विरोध

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने बनर्जी की याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी कोई चिकित्सीय आपात स्थिति नहीं है, जिसके लिए बनर्जी को आंखों के इलाज के लिए विदेश जाना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि बनर्जी के खिलाफ कई एफआईआर की जांच चल रही है और उनकी उपस्थिति आवश्यक हो सकती है।

जॉन ने बताया कि ऐसा केवल एक ही मामला है जिसमें न्यायालय ने विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, न्यायालय इस बात से सहमत नहीं हुआ कि बनर्जी की स्थिति का भारत में पहले आकलन किए बिना किसी भी प्रकार की विदेश यात्रा की अनुमति दी जाए, ताकि यह पुष्टि हो सके कि उनकी आंखों की स्थिति का देश के भीतर पर्याप्त रूप से इलाज नहीं किया जा सकता है।

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