सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अजय अनिरुद्ध तावरे को जमानत दे दी। तावरे पर आरोप है कि उन्होंने एक नाबालिग के रक्त (ब्लड) नमूने से छेड़छाड़ की थी। यह मामला पुणे के 2024 के पोर्श हिट-एंड-रन केस से जुड़ा है, जिसमें दो युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की मौत हो गई थी।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने आदेश दिया कि तावरे को जल्द से जल्द निचली अदालत में पेश किया जाए। निचली अदालत उन्हें जमानत पर रिहा करेगी, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। इन शर्तों में शामिल है कि तावरे मुकदमे में पूरा सहयोग करेंगे, अपनी आज़ादी का गलत इस्तेमाल नहीं करेंगे और किसी भी गवाह से सीधे या परोक्ष रूप से संपर्क नहीं करेंगे।
तावरे के वकील ने अदालत को बताया कि उनके सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है, इसलिए तावरे को भी वही राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि तावरे करीब 21 महीने से जेल में हैं।
महाराष्ट्र सरकार की ओर से वकील ने जमानत का विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि ससून अस्पताल में फोरेंसिक मेडिसिन के पूर्व प्रमुख रहे तावरे ने नाबालिग ड्राइवर के ब्लड सैंपल को बदलवाकर उसमें ‘शून्य अल्कोहल’ दिखाया और रिश्वत लेकर रजिस्टर में गलत एंट्री कराई।
इससे पहले पिछले साल 16 दिसंबर को बॉम्बे हाई कोर्ट ने तावरे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहां से अब उन्हें जमानत मिल गई है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिविल जज के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गाजियाबाद की एक सिविल अदालत के जज के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। यह मामला एक संपत्ति विवाद से जुड़ा था, जिसमें निचली अदालत ने एक किरायेदार को उस संपत्ति पर कब्जा और मालिकाना हक दे दिया था। पूरी खबर पढ़ें।
