झारखंड के जिला उपभोक्ता आयोग ने एक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और उसके सर्विस सेंटर को ग्राहक को करीब 2 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। ग्राहक ने शिकायत की थी कि रिपेयर के बाद उसका फ्रिज फट गया।

आयोग के अध्यक्ष सुनील कुमार सिंह और सदस्य प्रदीप कुमार मिश्रा व संजू शाही ने कंपनी और सर्विस सेंटर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना। आयोग ने उन्हें नए फ्रिज की कीमत 124999 रुपये देने का आदेश दिया।

इसके अलावा ग्राहक को मानसिक और आर्थिक परेशानी के लिए 50000 रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के लिए 25000 रुपये देने को कहा गया है। इस तरह कंपनी और सर्विस सेंटर को कुल 199999 रुपये देने होंगे। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता को कंपनी और सर्विस सेंटर की सेवा में कमी व अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के चलते शारीरिक, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इसलिए वह सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए मुआवजा पाने का हकदार है।

क्या है मामला?

शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने 1.09 लाख रुपये में एक फ्रिज खरीदा था। कुछ समय बाद फ्रिज ने ठीक से ठंडा करना बंद कर दिया। इसके बाद वह कंपनी के ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर पहुंचा।

शिकायत के मुताबिक, फ्रिज की आठ बार मरम्मत की गई और उसका कंप्रेसर भी बदला गया। आरोप है कि मरम्मत के दौरान फ्रिज में जरूरत से ज्यादा गैस भर दी गई। इसके बाद फ्रिज तेज आवाज के साथ फट गया।

घटना के बाद शिकायतकर्ता ने अधिकृत डीलर और कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया। उसने समस्या का समाधान करने की मांग की। शिकायतकर्ता के मुताबिक, कंपनी ने नया फ्रिज देने की पेशकश की थी जिसकी कीमत 124999 रुपये थी। हालांकि, उसे नया फ्रिज नहीं दिया गया और उसकी शिकायत का समाधान भी नहीं हुआ।

इसके बाद शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। कंपनी और सर्विस सेंटर ने मामले में अपना पक्ष नहीं रखा। सर्विस सेंटर आयोग के सामने पेश हुआ लेकिन उसने लिखित जवाब दाखिल नहीं किया।

आयोग ने शिकायतकर्ता के हलफनामे और खरीद बिल व ईमेल जैसे दस्तावेजों की जांच की। आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता का दावा इन सबूतों से साबित होता है।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता के दावे में दम है और मौखिक व दस्तावेजी सबूतों से उसकी बात की पुष्टि होती है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिसके आधार पर उसकी शिकायत को खारिज किया जा सके।

आयोग ने कंपनी और सर्विस सेंटर को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार माना। उन्हें 45 दिनों के भीतर ग्राहक को 1,24,999 रुपये, 50000 रुपये मुआवजा और 25000 रुपये मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया गया।

ग्राहक की समस्या को दूर करने की जिम्मेदारी कंपनी की

इस मामले से साफ है कि कंपनियों और उनके अधिकृत सर्विस सेंटर की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहक की समस्या को बार-बार मरम्मत करने के बजाय ठीक से दूर करें। खराब सामान को ठीक नहीं करना या ग्राहक से किया गया रिप्लेसमेंट का वादा पूरा नहीं करना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना जा सकता है।

उपभोक्ता अपनी शिकायत के लिए संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की उपभोक्ता हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं। झारखंड की हेल्पलाइन 1800-3456-598 है। इसके अलावा राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के नंबर 1915 पर भी मदद ली जा सकती है।