सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें अमित जोगी को राकांपा नेता राम अवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की पीठ ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ जोगी द्वारा दायर अपील पर स्थगन आदेश पारित किया था। जिसमें निचली अदालत द्वारा उनकी बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया गया था।
यह मामला राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता राम अवतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या से संबंधित है। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ला के करीबी सहयोगी जग्गी की 4 जून, 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप लगाया गया था कि यह हत्या राजनीतिक साजिश का परिणाम थी।
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने की थी। सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2007 में जोगी को बरी कर दिया था, जबकि कई अन्य लोगों को दोषी ठहराया था। इसके बाद जग्गी के बेटे ने बरी होने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की पीठ ने इस महीने की शुरुआत में निचली अदालत के फैसले को पलट दिया और जोगी को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सरकारी उदासीनता के 30 साल: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया 1 लाख जुर्माना
करीब तीन दशकों तक चली एक लंबी कानूनी लड़ाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली को “स्पष्ट उदासीनता” बताया है। अदालत ने एक सरकारी कर्मचारी के मामले में न केवल तत्काल कैडर पुनःआवंटन (reallocation) का आदेश दिया, बल्कि राज्य सरकार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। पढ़ें पूरी खबर।
