पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (पीएसआरएलएम) के तहत चल रही चयन प्रक्रिया में आगे की कार्यवाही पर रोक लगा दी है। जस्टिस संदीप मौदगिल ने परीक्षा में बैठे उम्मीदवारों को अंक देने के तरीके में मिली कुछ गड़बड़ियों को देखते हुए यह आदेश पारित किया है।
इससे पहले जस्टिस मौदगिल ने पूरी चयन प्रक्रिया की स्वतंत्र और अदालत की निगरानी में जांच करने का आदेश दिया था। बेंच ने यह भी कहा था कि भर्ती से जुड़े मूल रिकॉर्ड को कब्जे में लिया जाए।
कोर्ट ने पहली नजर में पाया था कि इस मामले में तय मानदंडों का पालन नहीं किया गया था।
बुधवार को ही पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब में फार्मासिस्ट यानी फार्मेसी अफसर के 454 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। अदालत ने आदेश दिया था कि नियुक्ति प्रक्रिया अगली सुनवाई की तारीख यानी 17 सितंबर तक स्थगित रहेगी।
इस मामले में क्या हुआ था?
चयन प्रक्रिया से जुड़े आवेदन पत्रों और अन्य डॉक्यूमेंट्स की जांच के लिए अदालत ने एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी का प्रमुख एडवोकेट विशाल शर्मा को बनाया गया था। विशाल शर्मा ने अपनी रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत के सामने रखी थी।
इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद जस्टिस मौदगिल ने कहा कि चयन प्रक्रिया की आगे की कार्रवाई पर अगली सुनवाई की तारीख तक रोक रहेगी क्योंकि पहली नजर में इस परीक्षा में बैठे उम्मीदवारों को जिस तरह अंक दिए गए उसमें कुछ गड़बड़ियां पाई गई हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।
याचिकाकर्ताओं ने क्या कहा?
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने दलील दी की चयन प्रक्रिया 100 अंकों की थी। इसमें 70 अंक लिखित परीक्षा के लिए और 30 अंक इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए रखे गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकार की ओर से इन 30 नंबरों को लेकर उम्मीदवारों को कितने अंक मिले, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
पिछली सुनवाई में भी अदालत ने कहा था कि सरकार की ओर से ऐसा कोई रिकार्ड पेश नहीं किया गया जिससे यह साबित हो सके कि शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के तहत कितने अंक दिए गए थे। अदालत ने कहा कि ऐसे में पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता को लेकर चिंता सामने आती है।
अदालत ने यह भी कहा था कि चयन प्रक्रिया के नतीजे में शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के लिए जो अंक दिए गए थे, इसके बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया था और इस वजह से उम्मीदवारों को परेशानी हुई।
उम्मीदवारों को यह पता करने का मौका नहीं मिला कि उनके अंकों का मूल्यांकन कैसे किया गया मतलब कि किसी उम्मीदवार को लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, शैक्षणिक योग्यता और अनुभव में अलग-अलग कितने अंक मिले।
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