सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के आसपास के क्षेत्र के लिए एक समग्र विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया। सीजेआई ने कहा कि जो विकास योजना तैयार की जाए, उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मंगलवार को निर्देश दिया कि योजना में सड़क चौड़ीकरण, वाणिज्यिक गतिविधियों का विनियमन और होटल, धर्मशाला, पेयजल, शौचालय, आपातकालीन निकास, सार्वजनिक परिवहन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों सहित नागरिक सुविधाओं जैसे पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए।
अदालत यूपी सरकार द्वारा एक वैधानिक ट्रस्ट ढांचे के माध्यम से प्रसिद्ध वृंदावन मंदिर के प्रशासन को अपने हाथ में लेने के कदम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने कहा कि तिरुपति मंदिर के विपरीत, जिसे स्थानिक लाभ प्राप्त है, बांके बिहारी मंदिर संकरी गलियों के बीच स्थित है और एक छोटा परिसर है, जिससे भीड़ प्रबंधन कहीं अधिक जटिल हो जाता है।
सीजेआई सूर्यकांत ने राज्य से लीक से हटकर सोचने का आग्रह किया और निर्देश दिया कि एक विशिष्ट विकास योजना तैयार की जाए और अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने मंदिर के इतिहास का भी उल्लेख किया और बताया कि जिला गजेटियर में इसे संत हरिदास द्वारा निर्मित बताया गया है। उन्होंने बताया कि जब मुगल सम्राट अकबर भेष बदलकर संत से मिलने आए, तो वे भगवान कृष्ण के लिए गाए जा रहे भक्ति गीतों से बहुत प्रभावित हुए और उन्हें पुरस्कृत करने की पेशकश की।
संत हरिदास, जो नेत्रहीन थे। उन्होंने अपने लिए कुछ भी लेने से इनकार कर दिया और इसके बजाय मंदिर के लिए भूमि मांगी। सीजेआई ने कहा, “हालांकि वह अंधे थे, फिर भी वह जानता थे कि वह अकबर था।”
गोस्वामी प्रबंधन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने तर्क दिया कि दर्शन के समय और धैर्य पूजा अनुष्ठान के स्थान में परिवर्तन किया गया है, जिससे “प्राचीन काल से चली आ रही” प्रथाओं में बाधा उत्पन्न हुई है। उन्होंने 25 मार्च के उस आदेश पर भी सवाल उठाया जिसमें फूल बंगला सेवा आयोजित करने के लिए 1,51,000 रुपये का भुगतान अनिवार्य किया गया था, जबकि पहले केवल बिजली और संबंधित खर्चों की वसूली की जाती थी।
न्यायालय ने समिति में मौजूदा गोस्वामी प्रतिनिधियों को प्रतिस्थापित करते हुए शयन भोग समूह से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी तथा राज भोग समूह से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी सहित चार नए सदस्यों को मनोनीत किया।
पीठ ने कहा कि धार्मिक रीति-रिवाजों और दिन-प्रतिदिन के कामकाज के संरक्षण के संबंध में उनके सुझावों पर समिति द्वारा उचित विचार किया जाएगा। पीठ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि समिति की कार्रवाई से मंदिर के आवश्यक धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
‘जबरन बेदखली नहीं की जाएगी’, दिल्ली जिमखाना क्लब को राहत, हाई कोर्ट में केंद्र का आश्वासन
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के आसपास के क्षेत्र के लिए एक समग्र विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया। सीजेआई ने कहा कि जो विकास योजना तैयार की जाए, उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। पढ़ें पूरी खबर।
