प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। एडीजे (POCSO एक्ट) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले की पूरी जांच करने का निर्देश भी दिया है।
कोर्ट के आदेश के बाद अब झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
क्या है यह मामला?
शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी ने सेक्शन 173(4) के तहत अर्जी दी थी जिसमें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी।
आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया है कि शंकराचार्य ने अपने गुरुकुल में बच्चों का यौन शोषण किया है। उन्होंने अपने आरोपों को साबित करने के लिए दो बच्चों को भी पेश किया था।
आशुतोष महाराज के अनुसार, प्रयागराज के माघ मेले में जब वे अपने शिविर में थे, तब दो नाबालिग लड़कों ने उनसे संपर्क किया और आरोप लगाया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में उनका यौन शोषण किया जा रहा है। अदालत ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा था। अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से जवाब दाखिल किया गया था जिसे रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया गया।
पॉक्सो अदालत के निर्देशानुसार दोनों नाबालिग लड़कों को अदालत में पेश किया गया था और उनके बयान दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों का खंडन करते हुए दावा किया है कि सरकार के खिलाफ बोलने और गायों की रक्षा के लिए आवाज उठाने के कारण कुछ लोग उन्हें निशाना बना रहे हैं।
यह विवाद 18 जनवरी को शुरू हुआ जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या में स्नान के लिए संगम जा रहे थे और पालकी में सवार थे। भारी भीड़ के कारण अधिकारियों ने उन्हें पालकी से उतरकर पैदल चलने को कहा। मेला प्रशासन का आरोप है कि उनके समर्थकों ने एक पुल पर लगे बैरिकेड को तोड़ दिया था, जिससे मुश्किल हालात बन गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का आरोप था कि प्रशासन ने माघ मेले के दौरान उन्हें संगम में स्नान करने से रोका और उसके समर्थकों के साथ अभद्रता की। इसके बाद उन्होंने 11 दिनों तक धरना दिया था।
अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर अखिलेश का हमला
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े विवाद को लेकर विधानसभा में कहा था कि शंकराचार्य की उपाधि का दावा करने का अधिकार सभी को नहीं है। उनके इस बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
