आईएएस अधिकारी फौजिया तरन्नुम को पाकिस्तानी कहने को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भाजपा विधायक (MLC) एन रविकुमार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वह इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।
आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली रविकुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्चिस एम नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि किसी सिविल सेवक के खिलाफ केवल उसके धर्म के कारण इस तरह की टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नागप्रसन्ना ने भाजपा विधायक को फटकार लगाते हुए कहा, “फौजिया तरन्नुम राज्य की आईएएस अधिकारी हैं। सिर्फ इसलिए कि वह मुस्लिम हैं। उन्हें पाकिस्तान से बताना कतई माफ नहीं किया जा सकता। इसको बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आपने यह क्या कहा है? क्या आपको लगता है कि आप कुछ भी बोल सकते हैं?”
न्यायालय ने आगे टिप्पणी की कि राजनेताओं की टिप्पणियों से संबंधित मामले न्यायपालिका पर बोझ डाल रहे हैं और उन्हें सार्वजनिक भाषणों में संयम बरतने की सलाह दी।
जुबान पर लगाम लगाएं राजनेता- जज
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आप सभी को अपनी जुबान पर लगाम लगानी चाहिए। वरना आपराधिक अदालतें बेवजह के मुकदमों से भर जाएंगी। हत्या और जबरन वसूली जैसे मामले 10 साल से लंबित हैं और ऐसे मामले अदालतों में बढ़ते जा रहे हैं, क्योंकि आपको अपनी जुबान पर नियंत्रण नहीं रखते।
जज ने आगे कहा, “चाहे आप किसी भी पार्टी के हों, आप दोनों को यह सब बंद कर देना चाहिए। सिर्फ एक-दूसरे पर कीचड़ उछालना बंद करो। नीतियों की बात नहीं होती, ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा नहीं होती। लोगों को इस बात में कोई दिलचस्पी नहीं है कि आप एक-दूसरे के खिलाफ क्या बोलते हैं। उन्हें सिर्फ अपने कल्याण की चिंता है।”
मई, 2025 में का मामला
मई 2025 में एक राजनीतिक रैली के दौरान एन रविकुमार ने आईएएस अधिकारी पर कांग्रेस पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने अधिकारी के पाकिस्तान से मूल संबंध होने को लेकर भी टिप्पणी की थी।
जब कोर्ट कोर्ट बताया गया कि रविकुमार ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है, तो न्यायालय ने सवाल उठाया कि क्या माफी मांग लेने से उनके बयान के प्रभाव को खत्म किया जा सकता है। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि धर्म के आधार पर एक आईएएस अधिकारी को कैसे निशाना बनाया जा सकता है।
अदालत ने कहा कि आप आईएएस अधिकारी को धर्म के आधार पर कैसे निशाना बना सकते हैं? आपको विरोध करने का पूरा अधिकार है, लेकिन इस तरह के बयान नहीं दिए जाने चाहिए।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट एम विनोद कुमार ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 193 और 353 के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि रवि कुमार ने यह भाषण भाजपा के उस विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया था, जब राज्य में विपक्ष के नेता को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया था।
विशेष लोक अभियोजक बीएन जगदीश ने कहा कि यदि रविकुमार को उपायुक्त के खिलाफ कोई शिकायत थी तो वह सार्वजनिक टिप्पणी करने के बजाय मुख्य सचिव या अन्य सक्षम अधिकारियों के समक्ष इस मामले को उठा सकते थे।
जस्टिस नागप्रसन्ना ने टिप्पणी की कि हालांकि रविकुमार की टिप्पणियां अस्वीकार्य थीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय ध्वज ले जाने से रोकना, यदि सच है, तो वह भी अस्वीकार्य होगा। नागप्रसन्ना ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने में क्या गलत है? आपको क्या समस्या है? अगर रविकुमार का बयान गलत है तो आपका काम भी गलत है। अगर विरोध प्रदर्शन के दौरान उन लोगों को राष्ट्रीय ध्वज ले जाने से रोका गया, तो हम उन पर जुर्माना लगाएंगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप ऐसे बयान दे सकते हैं।
सुनवाई समाप्त करने से पहले न्यायालय ने राज्य को विरोध प्रदर्शन के लिए मांगी गई अनुमति से संबंधित रिकॉर्ड प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड मंगवाओ। उन्होंने क्या निवेदन दिया था? उन्होंने किस विरोध प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी? अगर मुझे पता चलता है कि राष्ट्रीय ध्वज ले जाना उनके निवेदन का हिस्सा था और उन्हें ऐसा करने से रोका गया था, तो हम निश्चित रूप से इसकी जांच करेंगे। लेकिन मैं तुम्हें (रविकुमार) भी इस तरह की बातें करने के लिए नहीं छोडूंगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को होगी।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार शिवसेना के पार्षद रमेश म्हात्रे को ज्यूडिशियल कस्टडी से रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर कई शर्तें भी लगाई हैं। पार्षद रमेश म्हात्रे पर कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम के एक अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों पर कथित हमले का आरोप है। पढ़ें पूरी खबर।
