सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को वकील माणिक गुप्ता ने शिकायत की कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट और बदसलूकी की। यह घटना 23 जुलाई की है। जब वे निज़ामुद्दीन पुलिस थाने गए थे। वह जंतर-मंतर पर परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण हिरासत में लिए गए छात्रों की रिहाई के लिए वहां गए थे। शिकायतकर्ता माणिक गुप्ता दिल्ली की विभिन्न अदालतों, जिनमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, उसमें प्रैक्टिस करते हैं। गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में लंबित उस रिट याचिका में दखल देने की मांग की, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है।
अपनी अर्जी में गुप्ता ने कहा कि 23 जुलाई की रात, हिरासत में लिए गए छात्रों से मिली मदद की गुहार के बाद वे निज़ामुद्दीन थाने गए। उन्होंने आरोप लगाया कि एसएचओ ने उन्हें डराया-धमकाया और दूसरे अधिकारियों को उन्हें भी हिरासत में लेने का निर्देश दिया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर एक कमरे में ले जाया गया। जहां एक पुलिस अधिकारी ने उनकी गर्दन पकड़ी, थप्पड़ मारा और घूंसे मारे। जब उन्होंने कहा कि वे वकील हैं तो उनके साथ बदसलूकी की गई और पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें सबक सिखाया जाएगा।
एसएचओ ने मुझे धमकी दी- वकील
शिकायत के अनुसार बाद में एसएचओ ने उन्हें फोन किया और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की धमकी दी। फिर एसएचओ ने वकील के पिता को फोन किया और कहा कि वे रात में सड़कों पर घूम रहे थे। उनके वकील दोस्त जब थाने पहुंचे, तब उन्हें रिहा किया गया। गुप्ता ने बताया कि बाद में वे इलाज के लिए सुचेता कृपलानी अस्पताल गए और वहां मेडिको-लीगल केस रिपोर्ट तैयार की गई। उनके अनुसार एमएलसी रिपोर्ट, जिसमें चोटों का विवरण था, उन्होंने हिरासत में उनके साथ हुई हिंसा की पुष्टि की।
बाद में उन्होंने निज़ामुद्दीन थाने पर अपने अनुभव के बारे में दिल्ली के पुलिस आयुक्त और दिल्ली दक्षिण-पूर्व के डीसीपी को शिकायत भेजी। हालांकि, उन्होंने कहा कि शिकायत में गलत तरीके से कैद करने, गंभीर चोट पहुंचाने और आपराधिक धमकी देने जैसे गंभीर अपराधों का खुलासा होने के बावजूद, आज तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
इन दलीलों के साथ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र प्राधिकरण या रिटायर्ड जज की देखरेख में कराई जाए और अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जाए। उन्होंने उस समय के संबंधित थाने के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की भी मांग की। छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी बनाम भारत सरकार की रिट याचिका में पक्षकार बनने के लिए अर्ज़ी दायर की गई।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा की निगरानी में पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों से जुड़े 2025 के एक मामले को वापस लेने की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हाल ही में एक वीडियो में संदीप लांबा एक महिला को थप्पड़ मारते नजर आए थे। जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई को हुए पुलिस की कार्रवाई कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिसमें से एक अतिरिक्त डीसीपी संदीप लांबा का वीडियो भी सामने आया था। पढ़ें पूरी खबर।
