गुजरात हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी जानकारी व्यक्तिगत सूचना के दायरे में आती है और इसे केवल सार्वजनिक पद पर होने के आधार पर आरटीआई के तहत सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने 29 सितंबर को यह फैसला सुनाया। अदालत ने मार्च 2023 के एकल पीठ के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और केजरीवाल पर लगाए गए 25,000 रुपये के खर्च को भी बरकरार रखा।

RTI की धारा 8 के तहत व्यक्तिगत जानकारी

अदालत ने कहा कि RTI एक्ट की धारा 8(1)(e) और 8(1)(j) के तहत प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी के खुलासे पर रोक लागू होती है। इन धाराओं के तहत कुछ ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट दी गई है, जिनका संबंध फिड्यूशियरी संबंध और निजी जानकारी से है।

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ प्रधानमंत्री से जुड़ी होने के कारण कोई जानकारी अपने आप सार्वजनिक या व्यापक जनहित की जानकारी नहीं बन जाती। अदालत के मुताबिक, प्रधानमंत्री की डिग्री की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए जनहित की कोई जरूरी वजह सामने नहीं आई।

सार्वजनिक पद पर होने से निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं हो जाती

अदालत ने कहा कि कोई व्यक्ति सार्वजनिक पद पर है या सरकारी कर्मचारी है, सिर्फ इस आधार पर उसे अपनी निजी जानकारी जनता के सामने रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए कानून के तहत जानकारी सार्वजनिक करने की बाध्यता होनी चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षणिक डिग्री से जुड़ी जानकारी पहले से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की बात का RTI कानून के तहत जानकारी देने के दायित्व पर कोई असर नहीं पड़ता। यानी किसी सूचना का पहले से सार्वजनिक क्षेत्र में होना अपने आप उसे RTI के तहत सार्वजनिक करने योग्य नहीं बनाता।

2016 से चल रहा है मामला

यह विवाद वर्ष 2016 से चला आ रहा है। उस समय केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़ी जानकारी तलाशने और उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय और गुजरात विश्वविद्यालय को निर्देश दिए थे। गुजरात विश्वविद्यालय ने इस निर्देश को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

31 मार्च 2023 को गुजरात हाईकोर्ट की एकल पीठ ने CIC के 2016 के निर्देश को रद्द कर दिया था और केजरीवाल पर 25,000 रुपये का खर्च लगाया था। इसके खिलाफ केजरीवाल ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील दायर की थी।

केजरीवाल ने क्या दलील दी थी?

केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलीलें रखीं। उन्होंने एकल पीठ की उस टिप्पणी को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि गुजरात विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराए जाने के बावजूद केजरीवाल ने मामला जारी रखा।

उन्होंने 25,000 रुपये के खर्च को हटाने की भी मांग की। वहीं, गुजरात विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केजरीवाल की अपील का विरोध किया और एकल पीठ के आदेश तथा लगाए गए खर्च का बचाव किया।

कोर्ट ने राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी टिप्पणी की

अदालत ने कहा कि कानूनी संस्थाओं और अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक बदले की भावना निकालने के लिए सार्वजनिक मंच के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठा कोई राजनीतिक नेता अपनी राजनीतिक मंशा के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने आखिर में केजरीवाल की अपील खारिज कर दी और पहले के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री से संबंधित जानकारी के RTI खुलासे को लेकर दायर यह अपील भी खारिज हो गई और 25,000 रुपये का खर्च बरकरार रहा।

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