दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने लालू प्रसाद और उनकी पत्नी राबड़ी देवी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। जिनमें उन्होंने लैंड फॉर जॉब घोटाले मामले की सुनवाई में अपना बचाव पक्ष तैयार करने के लिए 1,600 से अधिक अप्रमाणित दस्तावेजों की मांग की थी। अदालत ने कहा कि ये याचिकाएं मुकदमे को शुरू से ही जटिल बनाने के उद्देश्य से दायर की गई थीं।
बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की ओर से करीब 1,600 से अधिक ‘अनरिलायड’ दस्तावेज (Unrelied Documents) उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। इन दस्तावेजों को जांच एजेंसियां जब्त तो करती हैं, लेकिन उन्हें अपने चार्जशीट में सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं करतीं। याचिका में कहा गया था कि इन दस्तावेजों की जरूरत बचाव पक्ष को अपनी दलीलें तैयार करने के लिए है, लेकिन अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
मामले की सुनवाई करते हुए स्पेशल जज विशाल गोगने ने अपने आदेश में कहा कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों को एक साथ उपलब्ध कराना न्यायिक प्रक्रिया को अव्यवस्थित कर देगा। उन्होंने इसे “उलटी गंगा बहाने (Place The Cart Before The Horse)” जैसा बताते हुए कहा कि इससे मुकदमे को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया जाएगा।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोपियों की यह मांग मुकदमे को लंबा खींचने की कोशिश है। जज ने अपने 35 पन्नों के आदेश में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया पर नियंत्रण कोर्ट का होता है और आरोपी जिरह के नाम पर इस पर कब्जा नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोपी यह शर्त नहीं रख सकते कि जिरह शुरू करने से पहले उन्हें सभी “अनरिलायड” दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं। अदालत के अनुसार, इस तरह की शर्तें न्यायिक प्रक्रिया के खिलाफ हैं और इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने अपने केस में शामिल नहीं किया है। इसलिए अब दोबारा से सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग उचित नहीं है। कोर्ट ने इस मामले के अन्य आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। इनमें लालू प्रसाद के निजी सचिव आर के महाजन और मीडिया कंपनी के महाप्रबंधक महीप कपूर शामिल हैं, जिन्होंने भी कुछ दस्तावेजों की मांग की थी।
मामला क्या पूरा?
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार , भूमि के बदले नौकरी का मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री के कार्यकाल (2004 से 2009) के दौरान का है। जब मध्य प्रदेश के जबलपुर में भारतीय रेलवे के पश्चिम मध्य जोन में की गई ग्रुप डी नियुक्तियों से संबंधित है, जिसके तहत भर्ती किए गए लोगों द्वारा आरजेडी सुप्रीमो के परिवार या सहयोगियों के नाम पर भूमि के टुकड़े उपहार में दिए गए या स्थानांतरित किए गए थे।
2022 में दर्ज हुआ केस
इस मामले में 18 मई 2022 को केस दर्ज किया गया था। इसमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, उनकी दो बेटियां और कई अन्य लोग आरोपी हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि मुकदमे की सुनवाई बिना किसी अतिरिक्त देरी के आगे बढ़ेगी। आरोपियों को तय प्रक्रिया के तहत ही अपनी दलीलें पेश करनी होंगी और अब ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिशों पर रोक लग गई है।
103 में पांच आरोपियों की हो चुकी मौत
इस मामले में 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं और 52 अन्य को बरी कर दिया गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दायर आरोपपत्र में नामित 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है।
‘आप हुक्म नहीं चला सकते’, I-PAC रेड पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका ठुकराई
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने I-PAC कार्यालय पर ईडी की छापेमारी से जुड़े मामले की सुनवाई टालने की अपील की थी। यह मामला उस रिट याचिका से जुड़ा है, जिसे ईडी ने दायर किया। इसमें आरोप लगाया गया है कि I-PAC के दफ्तर पर छापे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप किया था। पढ़ें पूरी खबर।
