Supreme Court News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस पर कथित ज्यादती के आरोप लगे थे। कोर्ट ने इन आरोपों की जांच के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने का आदेश दिया था। हालांकि, अब इस कमेटी के पुनर्गठन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने इस मामले का जिक्र किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील शंकरनारायण ने आवेदन के विषय का उल्लेख नहीं किया, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसे शरारती आवेदन बताया।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “यह शरारतपूर्ण है। याचिका में समिति का पुनर्गठन करने और इस-उस मंत्री की जांच करने की मांग की गई है। यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है। उन्होंने न्यायाधीशों के नाम दिए हैं।”
हम जजों के नामों का उल्लेख पंसद नहीं करते- सीजेआई
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम न्यायाधीशों के नामों का उल्लेख पसंद नहीं करते।” वकील शंकरनारायण ने जवाब देते हुए कहा, “मैंने बस इतना कहा कि आवेदन सूचीबद्ध किया जा सकता है। मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूं। आवेदन सूचीबद्ध होने पर भी, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, जैसा कि मैंने पिछली बार नहीं किया था। हममें से किसी ने भी नाम नहीं लिया। हमने हार मान ली और कोशिश की। इन चीजों को करने का एक तरीका होता है। इसलिए हम बस इतना अनुरोध करते हैं कि आवेदन सूचीबद्ध किया जाए। बस इतना ही।”
मुख्य न्यायाधीश ने जताई सहमति
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय ने सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध व्यक्तियों का चयन किया है। याचिकाकर्ताओं की आशंकाओं को दूर करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि समिति सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में और सभी पक्षों के सहयोग से काम कर रही है। मुख्य न्यायाधीश ने आवेदन को सूचीबद्ध करने पर सहमति जाहिर करते हुए कहा, “जो भी काम करेगा, वह हमारी देखरेख में काम करेगा। हमने इस मामले का निपटारा नहीं किया है। आप सभी समिति की सहायता के लिए मौजूद हैं। उन्हें काम करने दीजिए और देखिए।”
कोर्ट ने समिति का किया था गठन
बता दें कि 18 अगस्त को कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचाने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के प्रतिवादों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया था।
समिति के अन्य सदस्यों में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा , दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के पूर्व डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल थे।
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केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर 11 मार्च के फैसले पर स्पष्टीकरण और जरूरी दिशा-निर्देश मांगे हैं। दरअसल, इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने 2016 के बाद सिविल सेवा परीक्षा (CSE) में चयनित करीब 100 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) उम्मीदवारों के दावों पर विचार करने का आदेश दिया था। इन उम्मीदवारों के दावों को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने क्रीमी लेयर के नियमों के आधार पर खारिज कर दिया था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर….
