सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा पवन खेड़ा के खिलाफ दिए गए कुछ बयानों पर चिंता जताई। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की, जब वह खेड़ा को असम में दर्ज एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत दे रही थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंद्रकर की बेंच ने कहा कि सरमा के कुछ बयान “असंसदीय” थे और जमानत पर फैसला करते समय इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि राज्य के मुख्यमंत्री, जो इस मामले में शिकायतकर्ता के पति भी हैं, उन्होंने अपीलकर्ता (पवन खेड़ा) के खिलाफ ऐसे बयान दिए हैं। कोर्ट के मुताबिक, ये बयान इस बात की ओर इशारा करते हैं कि सरमा और खेड़ा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा भी है।
अदालत ने अपने आदेश में हिमंता बिस्वा सरमा के कई बयानों का भी उल्लेख किया। एक बयान (7 अप्रैल 2026) में उन्होंने कहा था कि वे “पवन खेड़ा को ‘पवन पेड़ा’ बना देंगे, कुछ दिन इंतजार करें।”
अन्य बयानों में हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा, “यह पवन खेड़ा कौन है? अगर वह नरक में भी छिपेगा, तो मैं उसे वहां से भी निकाल लूंगा।” “खेड़ा को पेलूंगा।”
अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ बयानों में कहा गया था कि अगर सत्ताधारी पार्टी दोबारा सत्ता में आती है, तो पवन खेड़ा को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ेगा। जैसे एक बयान में कहा गया,“अगर भाजपा की सरकार बनेगी, तो पवन खेड़ा अपनी जिंदगी के आखिरी दिन असम की जेल में बिताएंगे।”
बेंच ने यह भी बताया कि असम सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन बयानों का बचाव नहीं किया। अदालत ने कहा, “सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने इन बयानों का समर्थन नहीं किया और न ही इनकी सच्चाई पर कोई सवाल उठाया गया।”
कोर्ट ने पाया कि चुनाव अवधि के दौरान दोनों पक्षों ने सार्वजनिक बयानों में एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए थे। अतः न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि प्रथम दृष्टया , खेड़ा के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही राजनीतिक प्रतीत होती है न कि ऐसी परिस्थितियों में जिनमें हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता हो।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “आरोप और प्रत्यारोप प्रथम दृष्टया राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होते हैं और इस प्रकार की प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित प्रतीत होते हैं। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि यद्यपि जांच कानून के अनुसार आगे बढ़नी चाहिए, आपराधिक प्रक्रिया को निष्पक्षता के साथ लागू किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रभावित कार्यवाही से व्यक्तिगत स्वतंत्रता से समझौता न हो।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणियां पवन खेड़ा को असम में दर्ज एक एफआईआर के संबंध में अग्रिम जमानत देते समय कीं। जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने विधानसभा चुनावों से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री की पत्नी से संबंधित जाली दस्तावेज दिखाए गए थे। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां अग्रिम जमानत देने के प्रश्न तक ही सीमित थीं और आपराधिक कार्यवाही के गुण-दोष को प्रभावित नहीं करेंगी, जिसका निर्णय कानून के अनुसार स्वतंत्र रूप से किया जाएगा।
पवन खेड़ा को मिली राहत पर आया हिमंता बिस्वा सरमा का पहला बयान
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को राहत देते हुए शुक्रवार को उनकी अग्रिम जमानत की मांग स्वीकार कर ली। इस मामले पवन खेड़ा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीएम हिमंता पर तंज कसा था, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें सिंघवी से सीख लेने की कोई जरूरत नहीं है। पढ़ें पूरी खबर।
