ओडिशा उच्च न्यायालय ने रेलवे को एक विधवा को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। ओडिशा हाईकोर्ट ने रेलवे को निर्देश दिया है कि वह रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के एक कांस्टेबल की विधवा को 4 लाख रुपये का मुआवजा दे, जिसकी ड्यूटी के दौरान चलती ट्रेन की चपेट में आने से मृत्यु हो गई थी।

न्यायमूर्ति डॉ संजीव के पाणिग्राही ने रेलवे दावा न्यायाधिकरण द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इस आधार पर मुआवजे से इनकार किया गया था कि घटना रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 123(C) और 124-A के तहत अवांछित घटना नहीं थी। घटना के मुताबिक, मृतक आरपीएफ़ कांस्टेबल रेलवे यार्ड में भारी बारिश के कारण फिसल गया और चलती ट्रेन की चपेट में आ गया, जिसके चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

चलती ट्रेन की चपेट में आने से RPF कांस्टेबल की मौत

अपीलकर्ता का मामला यह था कि उनके पति जो 1996 में खुर्दा रोड रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल में कांस्टेबल के रूप में कार्यरत थे , भारी बारिश के कारण फिसल गए और चलती ट्रेन की चपेट में आ गए जिससे उनकी मृत्यु हो गई। भुवनेश्वर बेंच स्थित रेलवे क्लेम्स ट्रिब्यूनल के समक्ष उनकी याचिका इस आधार पर खारिज कर दी गई कि पीड़ित ड्यूटी पर नहीं था क्योंकि वह ड्यूटी से संबंधित कमांड सर्टिफिकेट पेश करने में विफल रही थीं। अपील के बाद, मामले को न्यायाधिकरण को वापस भेज दिया गया और उस पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया गया। न्यायाधिकरण ने एक बार फिर इस आधार पर याचिका खारिज कर दी कि घटना ‘अवांछित’ नहीं थी।

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हाईकोर्ट ने दिया RPF कर्मी की विधवा को मुआवजा देने का निर्देश

धारा 124-ए से जुड़ी व्याख्या में मुआवजे के प्रयोजनों के लिए ‘यात्री’ शब्द के अर्थ में ड्यूटी पर तैनात रेल कर्मचारी को स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायाधिकरण का यह निष्कर्ष कि मृतक यात्री के रूप में यात्रा नहीं कर रहा था, इस आधार पर घटना को अप्रिय घटना के रूप में नहीं माना जा सकता है, धारा 124-A की व्याख्या को स्पष्ट नहीं करता है। हाईकोर्ट ने न्यायाधिकरण द्वारा मृतक की ओर से हुई लापरवाही को घटना का कारण बताने वाला तर्क भी अमान्य कर दिया। अदालत ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता अपने पति की मृत्यु के कारण मुआवजे की हकदार है।