सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ओडिशा में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को दरकिनार करने की कोशिश कर रही है और डीजीपी पद के लिए अपात्र अधिकारियों को चयन पैनल में शामिल करने का प्रयास कर रही है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ इस मामले पर बुधवार को सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी चिदंबरम ने इस मामले का उल्लेख किया। चिदंबरम ने आरोप लगाया कि राज्य ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजे गए अधिकारियों के पैनल को वापस ले लिया है और अब एक नई सूची तैयार कर रहा है।

पी. चिदंबरम ने आगे आरोप लगाया कि सरकार एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) को डीजीपी के पद पर पदोन्नत करने और इसके बाद उस अधिकारी का नाम यूपीएससी को भेजे जाने वाले नए पैनल में शामिल करने की कोशिश कर रही है।

चिदंबरम की दलीलों पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यूपीएससी इस बात से भलीभांति परिचित है कि कौन अधिकारी पात्र है और किस पर विचार किया जा सकता है। कांत ने कहा कि अगर अपात्र अधिकारियों का पैनल भेजा जाता है तो यूपीएससी से अपेक्ष की जाती है कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्य करेगा।

फरवरी, 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

फरवरी 2026 में सर्वोच्च न्यायालय ने दोहराया था कि राज्यों को अपने डीजीपी की नियुक्ति के लिए प्रकाश सिंह बनाम भारत संघ मामले में दिए गए फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। न्यायालय ने निर्देश दिया था कि योग्य अधिकारियों पर यूपीएससी द्वारा गठित पैनल के माध्यम से विचार किया जाए, और फिर राज्य को आयोग द्वारा चयनित अधिकारियों में से डीजीपी की नियुक्ति करनी होगी।

शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर योग्य अधिकारियों की संख्या कम है तो सिर्फ इस आधार पर राज्य सरकार निर्धारित पात्रता मानकों को नजरअंदाज नहीं कर सकती। नियमों के मुताबिक, लेवल-17 के डीजीपी पद पर नियुक्ति के लिए लेवल-16 में डीजीपी स्तर के पद पर तैनात अधिकारियों में से चयन किया जाना है।

फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह के विवादों का सामना कर रहे राज्यों को डीजीपी की नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यूपीएससी से राज्य से संशोधित प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी अंतिम सिफारिशें देने को कहा था।

ओडिशा के वर्तमान डीजीपी 31 अगस्त को हो रहे रिटायर

ओडिशा में मौजूदा डीजीपी वाईबी खुरानिया की 31 अगस्त को सेवानिवृत्ति से पहले यह प्रक्रिया चल रही है। राज्य ने पहले तीन नाम भेजे थे, जिसके बाद उसने यूपीएससी को 11 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का एक विस्तृत पैनल भेजा। आयोग की बैठक 7 अगस्त को होनी थी जिसमें इस पद के लिए तीन अधिकारियों का चयन किया जाना था।

सुप्रीम कोर्ट में पी. चिदंबरम की दलीलें

आज सीनियर वकील पी चिदंबरम ने कहा कि राज्य का यह कदम प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। उन्होंने बताया कि राज्य ने अप्रैल में यूपीएससी को एक पैनल भेजा था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया। मई में, तीन डीजीपी और आठ एडीजीपी वाले एक अन्य पैनल को यूपीएससी को भेजा गया।

चिदंबरम के अनुसार, यूपीएससी ने 7 अगस्त को संकेत दिया था कि वह केवल डीजीपी स्तर के अधिकारियों पर ही विचार करेगी। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त को यूपीएससी ने आपत्ति जताते हुए कहा, ‘हम केवल डीजीपी स्तर के उम्मीदवारों पर ही विचार करेंगे।’ फिर बैठक वाले दिन या उससे एक दिन पहले या बैठक के दौरान, उन्होंने सूची वापस लेने का दावा किया। अब वे जल्दबाजी में एक और सूची तैयार करके भेजने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले यूपीएससी को यह अनुमति दी थी कि यदि राज्य योग्य अधिकारियों का पैनल भेजने में विफल रहते हैं तो वह उससे संपर्क कर सकता है। सीजेआई कांत ने कहा कि कहा कि यूपीएससी को इस बात की जानकारी थी कि कौन से अधिकारी विचार के लिए पात्र हैं और उनसे अदालत के निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि हम यूपीएससी से अपने फैसले का पालन करने की उम्मीद करते हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को होगी।

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‘क्या टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी इतने प्रभावशाली हैं कि अगर उन्हें गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाती है तो वे चल रही पुलिस जांच में बाधा डाल सकते हैं?’ कलकत्ता हाई कोर्ट ने यह सवाल तब उठाया जब कहा गया कि अगर अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा दी जाती है तो वह पुलिस जांच में दखल दे सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर।