दिल्ली हाई कोर्ट से दिल्ली पुलिस को एक बार फिर से झटका लगा है। क्योंकि हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों मामले में कांग्रेस पार्षद इशरत जहां को जमानत देने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नवीन चावला और रविंदर दुदेजा की खंडपीठ ने कहा कि स्पेशल कोर्ट द्वारा इशरत जहां को जमानत दिए जाने के बाद से चार साल से ज्यादा समय बीत चुका है और ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि उसने जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया है।
इशरत जहां को मार्च 2020 में दिल्ली दंगों के एक मामले में भारतीय दंड संहिता, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से रोकने वाले अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत कथित अपराधों के लिए गिरफ्तार किया गया था।
स्पेशल कोर्ट ने मार्च 2022 में इशरत जहां को जमानत दे दी थी। यह देखते हुए कि वह चक्का जाम के विचार की सूत्रधार नहीं थीं और न ही वह उन संगठनों या व्हाट्सएप समूहों में से किसी की सदस्य थीं, जिन्होंने इस साजिश में भूमिका निभाई थी।
अपनी अपील में दिल्ली पुलिस ने तर्क दिया कि निचली अदालत ने उसके समक्ष प्रस्तुत किए गए सबूतों और बयानों को नजरअंदाज कर दिया। पुलिस ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बड़े पैमाने पर हिंसक दंगे भड़काने की एक भयावह साजिश को स्पष्ट रूप से दर्शाने वाले सबूतों को खारिज करते हुए आदेश पारित किया।
दिल्ली पुलिस की याचिका में कहा गया है, “यह भी ध्यान देने योग्य है कि उक्त दंगे क्षणिक आवेग या सांप्रदायिक क्रोध के कारण नहीं हुए, बल्कि बहुस्तरीय, बहु-संगठनात्मक तरीके से पूर्व नियोजित थे।” इसमें कहा गया है कि दंगों का वक्त इशरत जहां और अन्य सह-साजिशकर्ताओं द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा के साथ सावधानीपूर्वक चुना गया था, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
याचिका में आगे यह तर्क दिया गया कि निचली अदालत का आदेश न केवल स्थापित कानून के विपरीत था, बल्कि उसमें ऐसी खामियां थीं जो मामले की जड़ तक जाती हैं। जनवरी 2024 में निचली अदालत ने इशरत जहां के खिलाफ हत्या के प्रयास और दंगा करने के आरोप तय किए थे।
‘पवन खेड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी’, हाई कोर्ट बोला- एक निर्दोष महिला को विवादों में घसीटा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें अब बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पवन खेड़ा से हिरासत में पूछताछ करना जरूरी है, ताकि उन व्यक्तियों का पता लगाया जा सके जिन्होंने उन्हें यह दावा करने के लिए फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए थे कि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन विदेशी पासपोर्ट और संयुक्त राज्य अमेरिका में एक कंपनी है। पढ़ें पूरी खबर।
