मुंबई की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने 2021 के एंटीलिया बम धमकी और मनसुख हिरेन हत्या मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को मंगलवार को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत आतंकवाद का प्रथम दृष्टया मामला साबित करने में नाकाम रहा।
29 सितंबर के आदेश में विशेष सत्र न्यायाधीश चकोर एस. बाविस्कर ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह माना जा सके कि अंबानी परिवार को किसी भी तरह से डराया-धमकाया गया था।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जज ने आगे कहा, “अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस मामला पेश नहीं कर पा रहा है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी सचिन (वाजे) वास्तव में किसके मन में दहशत पैदा करना चाहता थे। अगर हम यह मान भी लें कि वह अंबानी परिवार के मन में दहशत पैदा करना चाहता थे तो भी यह मानना असंभव है कि वास्तव में किसी के मन में, कम से कम अंबानी परिवार के मन में, ऐसी कोई दहशत पैदा हुई हो। क्योंकि अभी तक अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य या उनके करीबी रिश्तेदारों का कोई बयान दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 161 या धारा 164 के तहत दर्ज नहीं किया गया है।”
अदालत ने कहा, “रिकॉर्ड पर ऐसी कोई भी बात नहीं है, जिससे यह अंदाजा भी लगाया जा सके कि अंबानी परिवार या उनमें से किसी को भी किसी तरह से डराया-धमकाया गया हो.” अदालत ने कहा कि अंबानी के घर के पास खड़ी एसयूवी में मिली जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर नहीं थे. ऐसे में वे विस्फोट करने के उद्देश्य से उपयोगी नहीं थीं और यूएपीए की धारा 15 के तहत ‘आतंकवादी कृत्य’ की परिभाषा के लिए जरूरी “साधन” की श्रेणी में नहीं आती थीं.
न्यायाधीश ने पीड़ितों से पूछताछ करने में विफल रहने के लिए एनआईए की कड़ी आलोचना की। अदालत ने कहा कि अंबानी परिवार के किसी भी सदस्य के बयान दर्ज न करने के कारण चाहे जो भी हों, यह निश्चित रूप से अभियोजन पक्ष के मामले की विश्वसनीयता के लिए हानिकारक है। अदालत ने पाया कि घटना के बाद, पीड़ित और परिवार के अन्य सदस्य आम तौर पर आसानी से उपलब्ध रहते हैं।
न्यायाधीश ने कहा कि जांच एजेंसी यानी एनआईए का कार्यालय और एंटीलिया, यानी अंबानी परिवार का निवास स्थान, सचमुच एक दूसरे से सटे हुए हैं! उन्होंने आगे कहा कि यदि यह सरासर अक्षमता नहीं है, तो इस चूक को अत्यंत दयनीय दृष्टि से देखा जाना चाहिए।
अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि सचिन वाजे ने मुकेश अंबानी के आवास के पास विस्फोटक से भरी एसयूवी खड़ी की थी, ताकि उनसे पैसे वसूले जा सकें। इसके बाद हुई घटनाओं के कारण मनसुख हिरन की हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने दोष अपने ऊपर लेने से इनकार कर दिया था। अदालत ने हत्या को स्वीकार किया, लेकिन यह निष्कर्ष निकाला कि हत्या किसी आतंकवादी कृत्य का प्रत्यक्ष परिणाम नहीं थी।
इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मुख्य सह-आरोपी प्रदीप शर्मा और सुनील माने को पहले ही जमानत मिल चुकी है। समानता का सिद्धांत वाजे के पक्ष में था, जो मार्च 2021 में अपनी गिरफ्तारी के बाद से जेल में बंद है।
अदालत ने वाजे को स्थानीय ज़मानतदार के साथ 1 लाख रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया। आदेश के अनुसार, जब तक महत्वपूर्ण गवाहों के साक्ष्य दर्ज नहीं हो जाते, तब तक उन्हें बृहन्मुंबई, नवी मुंबई, रायगढ़, ठाणे और पालघर में प्रवेश करने से रोक दिया गया है।
क्या है मामला?
दक्षिण मुंबई में 25 फरवरी, 2021 को उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के पास एक एसयूवी में विस्फोटकों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री मिली थी। इस एसयूवी के मालिक व्यवसायी मनसुख हिरेन 5 मार्च, 2021 को पड़ोसी ठाणे की एक खाड़ी में मृत पाए गए थे।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत दे दी। अदालत ने उन पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं और 21 अक्टूबर को हल्दिया की अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। पढ़ें पूरी खबर।
