इलाहाबाद हाई कोर्ट ने NIA अधिकारी तनजील अहमद और उनकी पत्नी फरजाना की 2016 में हुई हत्या के मामले में अंतिम बचे दोषी रेयान को बरी कर दिया है। जिसे पहले एक स्थानीय अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।

यह फैसला सोमवार को जस्टिस सिद्धार्थ ने सुनाया। जिन्होंने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया और रेयान की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। यह देखते हुए कि मृत्युदंड कानून में कायम नहीं रह सकता।

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए तनजील अहमद के चचेरे भाई हसीब अहमद ने कहा कि परिवार को न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि वह हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अंततः न्याय की जीत होगी।

2022 में एक सत्र न्यायालय ने मुनीर और उसके सहयोगी रेयान को “दुर्लभतम अपराध” करार देते हुए मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि, मुनीर की नवंबर 2022 में हिरासत में ही गुर्दे के संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई। आरोप है कि बिजनौर और अलीगढ़ सहित कई जिलों में उसके खिलाफ 33 आपराधिक मामले दर्ज थे।

तनजील अहमद, जो इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े आतंकी मामलों की जांच कर रहे थे। वो 2-3 अप्रैल, 2016 की रात को बिजनौर के सहसपुर में एक शादी में शामिल होने के बाद अपने परिवार के साथ दिल्ली लौट रहे थे। तभी बाइक पर सवार दो हमलावरों ने उनकी कार को रोका और गोलियां चला दीं। उनकी पत्नी ने बाद में नई दिल्ली के एम्स में दम तोड़ दिया। हमले के समय दंपति के दो बच्चे भी गाड़ी में मौजूद थे।

इससे पहले, एक विशेष अदालत ने भी आरोपियों को गैंगस्टर एक्ट के तहत दोषी ठहराया था। उस मामले में मुनीर और रेयान को कारावास की सजा मिली थी, जबकि तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था।

अजहरी को हाई कोर्ट से झटका, भाजपा शासित राज्यों को लेकर दिया था विवादित बयान

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के राज्य अध्यक्ष नूर अहमद अजहरी के खिलाफ एक वायरल वीडियो को लेकर चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया। वीडियो में अजहरी ने कथित तौर पर कहा था कि भाजपा शासित राज्य मुसलमानों को डराने की कोशिश कर रहे हैं और संविधान उल्लंघन कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।