Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बुधवार को सिंगल जज के एक निर्देश को रद्द कर दिया। सिंगल जज के निर्देश में विश्वविद्यालय से निष्कासित छात्र को 30 दिन तक 30 मिनट के लिए विश्वविद्यालय के गेट पर एक तख्ती लेकर खड़े रहने के लिए कहा गया था। जिस पर संदेश लिखा हो कि वह “कभी किसी लड़की के साथ दुर्व्यवहार नहीं करेगा”।

लाइल लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस क्षितिज शैलेंद्र की पीठ ने इस निर्देश को अनुचित और अपमानजनक बताते हुए रद्द कर दिया। पीठ ने कहा कि इस तरह की सजा छात्र के चरित्र पर “स्थायी दाग” छोड़ देगी। पीठ छात्र द्वारा दायर एक रिट याचिका में अक्टूबर में सिंगल जज द्वारा पारित आदेश के खिलाफ दायर एक विशेष अपील की सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस मामले पर विचार किया। अदालत ने देखा कि छात्र के पिता एक गरीब किसान हैं, इसलिए एकल न्यायाधीश ने छात्र के निष्कासन को रद्द कर दिया था, लेकिन कुछ शर्तें लगाई थीं।

इन शर्तों में शामिल था-

95% उपस्थिति बनाए रखने का वचन देते हुए नोटरीकृत हलफनामा देना

कक्षा के समय कॉलेज परिसर से बाहर न जाना

72 घंटे के भीतर लिखित माफीनामा जमा करना

और एक शर्त यह भी थी कि छात्र को एक प्लेकार्ड (तख्ती) लेकर खड़ा होना होगा

इसी प्लेकार्ड वाली शर्त को छात्र ने चुनौती दी। छात्र के वकील ने कहा कि यह शर्त अपमानजनक है और इससे छात्र के भविष्य और करियर पर बुरा असर पड़ेगा, इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए। वहीं विश्वविद्यालय के वकील ने दलील दी कि याचिका सुनवाई के लायक नहीं है और एकल न्यायाधीश ने पहले ही छात्र पर नरमी बरतते हुए उसे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दे दी थी।

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मामले की सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि बाकी शर्तें तो ठीक हैं, लेकिन प्लेकार्ड वाली शर्त किसी भी हालत में उचित नहीं है, खासकर जब छात्र की पिछली उपस्थिति पहले ही कमजोर रही हो। ऐसी शर्त अपमानजनक है।

इसलिए अदालत ने प्लेकार्ड से जुड़ा निर्देश रद्द कर दिया। अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर छात्र को सिर्फ इसलिए निष्कासित किया गया था क्योंकि उसने प्लेकार्ड वाली शर्त नहीं मानी, तो उसे लिखित माफी देने का एक और मौका दिया जाए। यदि छात्र माफी दे देता है और आगे ईमानदारी से उपस्थिति की शर्तों का पालन करता है, तो उसका निष्कासन पूरी तरह रद्द कर दिया जाएगा।

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