Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पब्लिक अथॉरिटी की लापरवाही से होने वाली मौतों को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। बेंच ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जनहित याचिका काफी व्यापक प्रकृति की है और मांगे गए निर्देशों को लागू करना संभव नहीं होगा।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को राज्य अधिकारियों की लापरवाही से होने वाली मौतों को रोकने के लिए एसओपी को तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें असुरक्षित बुनियादी ढांचा, अधूरे निर्माण, खराब वायरिंग से बिजली का झटका लगना जैसे मामले शामिल थे।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं के वकील ने इस बात पर जोर दिया कि अधिकारियों को बार-बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने इस तरह की मौतों का हिसाब रखने के लिए तंत्र की जरूरत पर बल दिया। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वर्तमान याचिका पहले दायर की गई समान राहत की मांग वाली याचिका की हूबहू नकल प्रतीत होती है।

हर राज्य की वित्तीय बाधाएं अलग-अलग होंगी- सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि हर एक राज्य अलग-अलग वित्तीय बाधाओं का सामना कर रहा है और एक जैसी एसओपी एक व्यावहारिक समाधान नहीं होगा। उन्होंने कहा, “हर राज्य पर अलग-अलग तरह का दबाव होगा, हर राज्य की वित्तीय बाधाएं अलग-अलग होंगी। कुछ राज्य कर्ज लेकर कर्मचारियों को वेतन और बकाया राशि का भुगतान कर रहे हैं, पिछले कुछ समय में भर्तियां भी न के बराबर हुई हैं। सभी राज्य, जैसे ही आप उनसे एक समान एसओपी की मांग करेंगे, वे कहेंगे कि उनके पास पैसे नहीं हैं।” वकील ने हिरासत में मौत, पुल का ढहना जैसे मुद्दों पर जोर दिया।

सीजेआई ने मांगी गई अनेक राहतों पर विचार करते हुए टिप्पणी की, “आपकी याचिका एक शोरूम या शॉपिंग मॉल की तरह है, जिसमें सड़क के गड्ढे से लेकर पुलिस भवन, पुलों का अधूरा निर्माण, अंडरपास, सब कुछ शामिल है। आप ऐसी किसी राहत का नाम बताइए जो आपको नहीं चाहिए? सब कुछ यहां मौजूद है।”

हम इस मामले की खूबियों पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं- सुप्रीम कोर्ट

याचिका खारिज करते हुए बेंच ने कहा, “जब तक उठाए गए मुद्दे किसी विशेष राज्य से संबंधित न हों, तब तक ऐसे निर्देश जारी करना असंभव है जो पूरी तरह से अव्यवहारिक हों। इसलिए हमने इस रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ताओं को उचित रूप से तैयार दलीलों के साथ संबंधित हाई कोर्ट में जाने का विकल्प दिया है। हम स्पष्ट करते हैं कि हम मामले की खूबियों पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं।”

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