हैदराबाद स्थित NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में आगामी दीक्षांत समारोह को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विधि के करीब 450 छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखकर सीजेआई सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में आमंत्रित नहीं करने की मांग की है।
सीजेआई सूर्यकांत के बुलाने का विरोध करने वाले छात्रों में एलएलबी और एलएलएम के अंतिम वर्ष के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों ने यह मांग सीजेआई सूर्यकांत की उस हालिया टिप्पणी के संदर्भ में की है, जो उन्होंने NEET विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की थी।
हालांकि, NALSAR विश्वविद्यालय ने अभी तक दीक्षांत समारोह की तिथि की घोषणा नहीं की है और न ही मुख्य अतिथि के नाम की पुष्टि की है। लेकिन NALSAR में पिछले कई वर्षों से मौजूदा सीजेआई ही दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधन देते रहे हैं।
‘समारोह को लेकर अनिश्चितता’
फैकल्टी के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छात्रों के विरोध को देखते हुए संभावना है कि विश्वविद्यालय इस साल दीक्षांत समारोह रद्द कर दे।
एलएलबी के पास आउट होने वाले छात्रों के 70 सदस्यों ने 23 जुलाई को अधिकारियों को पहला ज्ञापन भेजा। 25 जुलाई तक, 2027, 2028, 2029, 2030 और 2031 बैच के लगभग 380 छात्रों ने इस बयान के समर्थन में एकजुटता व्यक्त की और विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने अलग-अलग पत्र जारी किए।
22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में 20 जुलाई को छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई के दौरान कथित ज्यादतियों का स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। जब एक वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस की कथित बर्बरता के वीडियो सबूत मौजूद हैं, तो सीजेआई सूर्यकांत ने मौखिक रूप से उन वीडियो को देखने से इनकार करते हुए कहा कि अदालत का समय बर्बाद नहीं किया जाना चाहिए।
छात्रों ने सीजेआई की इस टिप्पणी के अगले ही दिन लिखे अपने पहले पत्र में लिखा, “हमारी चिंताएं माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की बर्बर कार्रवाई से संबंधित याचिका की तत्काल सुनवाई की अनुमति न देने से पैदा हुई हैं।
छात्रों ने आगे कहा कि दीक्षांत समारोह एक ऐसा अवसर होता है जहां विश्वविद्यालय के अपने मूल्य, जिनमें संवैधानिक अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता, न्याय तक पहुंच और शिकायतों पर तर्कसंगत विचार जैसे मूल्यों की झलक उसके फैसलों में दिखाई दे। छात्रों ने कहा कि हम महसूस करते हैं कि एक ऐसे गणमान्य व्यक्ति से अपनी उपाधियां प्राप्त करना, जिनका हालिया सार्वजनिक आचरण… प्रदर्शनकारी नागरिकों के खिलाफ पुलिस बर्बरता के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करता प्रतीत होता है, उन मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता जो हमें NALSAR में अपने समय के दौरान सिखाए गए हैं… इसलिए हम विश्वविद्यालय से इस दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि के चयन पर गंभीरता से पुनर्विचार करने का अनुरोध करते हैं।
अगले कुछ दिनों में NALSAR के विभिन्न बैचों के कई छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इसी विषय पर पत्र लिखा। 2029 में उत्तीर्ण होने वाले बैच ने लिखा, “हम स्नातक बैच द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं से सहमत हैं। हमारा यह भी मानना है कि उनकी प्रस्तुति से ऐसे प्रश्न उठते हैं जो किसी एक स्नातक बैच के तात्कालिक हितों से परे हैं और NALSAR द्वारा अपनाए जाने वाले संवैधानिक मूल्यों से संबंधित हैं।”
2028 बैच के छात्रों द्वारा लिखे गए पत्र के अनुसार, छात्र दीक्षांत समारोह में वर्तमान मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति का “कड़ा विरोध” करते हैं।
2030 बैच के छात्रों का पत्र अधिक स्पष्ट शब्दों में लिखा गया था। इसमें कहा गया था, “जैसा कि रिकॉर्ड में दर्ज है (मुख्य न्यायाधीश ने ये टिप्पणियां की थीं) ‘कृपया हमारा समय बर्बाद न करें। हमारे पास ये वीडियो देखने का समय नहीं है।’ पहले भी मुख्य न्यायाधीश ने युवाओं को ‘प्रणाली पर हमला करने वाले परजीवी और कॉकरोच’ कहा था। हमारा मानना है कि भारत के सर्वोच्च न्यायधीश का ऐसा आचरण हमारे संविधान के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है और उन मूल्यों के साथ मेल नहीं खाता जिनका पालन NALSAR ने अपने पूरे इतिहास में किया है।”
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सीजेआई सूर्यकांत ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी बात को गलत तरीके से पेश किया। सीजेआई का कहना था कि उनकी टिप्पणी केवल उन लोगों को लेकर थी, जिन्होंने फर्जी या जाली डिग्री के जरिए अलग-अलग पेशों में प्रवेश किया है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने जब NALSAR विश्वविद्यालय प्रशासन से इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी तो कुलपति टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। हालांकि, फैकल्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि प्रशासन ने इस मामले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है। उन्होंने कहा कि इस बात की चर्चा है कि इस बार दीक्षांत समारोह को ही रद्द किया जा सकता है, ताकि भारत के मुख्य न्यायाधीश को होने वाली किसी और असहज स्थिति से बचाया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने देश के चार प्रमुख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में चार वरिष्ठ उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को पदोन्नति की औपचारिक रूप से सिफारिश की है। इन सिफारिशों में बॉम्बे, कलकत्ता, पटना और पंजाब एवं हरियाणा कोर्ट में मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्तियों को शामिल किया गया है। कॉलेजियम ने छह अगस्त को इसको लेकर बैठक की थी। पढ़ें पूरी खबर।
