मुजफ्फरनगर जिला कोर्ट के जज रवि कुमार दिवाकर ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वे माफिया, बाहुबलियों या अपराधियों के दबाव में झुकने और कायर कहलाने के बजाय मरना ज्यादा पसंद करेंगे। जज रवि कुमार हाल ही अपने फैसलों के कारण सुर्खियों में आए थे, उन्होंने महज चार महीने के भीतर 22 मौत की सजा सुनाई थी।
उन्होंने कहा कि वह सिर्फ भगवान से डरते हैं और यह उनके माता-पिता ने सिखाया है। जज रवि कुमार का यह बयान दहेज हत्या के एक मामले में फैसला सुनाते समय आया, इसमें उन्होंने 7 सितंबर को एक व्यक्ति को मौत की सजा सुनाई थी।
‘जब तक कुर्सी पर हूं, फैसले लेने का अधिकार सिर्फ मेरा ही होगा’
मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने लिखा, “अगर मैं दूसरी ताकतों से डरने लगूं तो मेरे लिए इस पवित्र न्यायिक संस्थान से इस्तीफा देना ही सही होगा। मैं मरना पसंद करूंगा, लेकिन कायर जज नहीं कहलाना चाहूंगा। जब तक मैं अपने सिद्धांतों का पालन कर सकता हूं, मैं अपनी सेवा जारी रखूंगा, जब तक मैं जज की कुर्सी पर हूं, फैसले लेने का अधिकार सिर्फ मेरा ही होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें बचपन से ही सिखाया था कि हमेशा भगवान से डरो, किसी इंसान से नहीं। अगर वह ईश्वरीय शक्ति के अलावा किसी और से जैसे- बाहुबलियों,माफिया या अपराधियों से डरते हैं तो यह उन आम लोगों की उम्मीदों के बिल्कुल खिलाफ होगा जो अदालतों में यह भरोसा लेकर आते हैं कि जज निष्पक्ष, निडर और साहसी होंगे और बिना किसी डर के अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करेंगे।
जज से वापस लिए गए केस
मुजफ्फरनगर के जिला और सेशन जज के 18 अगस्त के एक प्रशासनिक आदेश से पता चला कि जज रवि कुमार के पास लंबित हत्या के 97 केस हाल ही में दूसरे जज को ट्रांसफर कर दिए गए। जज रवि ने पिछले चार महीने में 10 केसों में 22 लोगों को मौत की सजा सुनाई थी।
जिला जज के इस आदेश की एक कॉपी द इंडियन एक्सप्रेस के पास है। इसमें उन 97 केसों की जानकारी दी गई है जिन्हें एडिशनल जिला और सेशन जज (FTC-3) रवि कुमार दिवाकर की कोर्ट से वापस लिया गया है।
मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर 3 के जज रवि कुमार ने 6 अप्रैल से 17 जुलाई के बीच यानी महज 100 दिनों में हत्या के सात अलग-अलग मुकदमों में 22 आरोपियों में से 17 लोगों की मौत की सजा सुनाई थी।
बीएनएस की धारा 407 से 412 के तहत सेशंस कोर्ट द्वारा सुनाई गई किसी भी मौत की सजा पर तब तक अमल नहीं किया जा सकता जब तक कि हाईकोर्ट उसे मंजूरी न दे दे, इसलिए मुजफ्फरनगर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई मौत की सभी सजाओं को मंजूरी के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जाएगा। साथ ही दोषी जो अपीलें अलग से दायर करेंगे, उन पर भी विचार किया जाएगा।
यह भी पढ़ें: ‘दिल्ली बिल्डिंग हादसे के बाद अब पूरे देश में होगी असुरक्षित इमारतों की जांच’, सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को करेगा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वह दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना के मद्देनजर पूरे देश में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की जांच करने पर विचार कर रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
