मुंबई की एक कोर्ट ने हत्या के आरोपी विजय पालंदे की याचिका को खारिज कर दिया है। पालंदे की याचिका में उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक (SPP) के पद से हटाने की मांग की थी। उज्ज्वल निकम वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य भी हैं।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, विजय पालंदे पर 2012 में दिल्ली के एक कारोबारी अरुणकुमार टिक्कू की हत्या का आरोप है। इसके अलावा, वह दो और हत्या के मामलों का भी सामना कर रहा है और इस समय न्यायिक हिरासत में है।
पालंदे का कहना था कि राज्यसभा के लिए मनोनीत होने के बाद उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नहीं बने रहना चाहिए। उनके अनुसार, यह पद राज्य सरकार के अधीन ‘लाभ का पद’ है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 102 का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि जो व्यक्ति सरकार के अधीन लाभ का कोई पद धारण करता है, वह संसद का सदस्य बनने के योग्य नहीं होता। हालांकि, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आर.जे. पवार ने पालंदे इस दलील को स्वीकार नहीं किया और आवेदन खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि उज्ज्वल निकम की विशेष लोक अभियोजक के रूप में नियुक्ति गलत नहीं है और इसी वजह से उनकी राज्यसभा सदस्य बनने की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ता। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 102(1)(क) में ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि अगर कोई व्यक्ति सरकार के अधीन किसी पद पर है, तो वह विशेष लोक अभियोजक नहीं बन सकता या इससे वह सांसद बनने के लिए अयोग्य हो जाएगा।
इसके साथ ही अदालत ने महाराष्ट्र राज्य बनाम प्रकाश प्रहलाद पाटिल मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत फैसलों में अदालत को बिना ठोस कारण के दखल नहीं देना चाहिए। अदालत ने कहा कि उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करना राज्य सरकार का नीतिगत फैसला है, और इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसलिए अदालत ने माना कि यह याचिका कानूनन सही नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।
पालंदे ने तर्क दिया था कि निकम भाजपा के प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य होने के नाते अनुचित प्रभाव और शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं और अपने मामले में दोषसिद्धि हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।
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राज्य और निकम ने याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया कि न तो पुरानी दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 और न ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत ऐसा कोई प्रावधान है जो राज्यसभा के लिए मनोनीत होने के बाद विशेष लोक अभियोजक को अयोग्य ठहराता हो। उन्होंने तर्क दिया कि विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति विशुद्ध रूप से विशिष्ट मामलों के लिए संविदा के आधार पर होती है और यह लाभ का पद धारण करने के बराबर नहीं है, क्योंकि राज्य के साथ कोई स्वामी-सेवक संबंध नहीं है।
अदालत ने राज्य और निकम के तर्कों से सहमति जताते हुए पालंडे की अर्जी खारिज कर दी। निकम ने कई मामलों में महाराष्ट्र सरकार के कानूनी सलाहकार के रूप में प्रतिनिधित्व किया है। इनमें 26/11 आतंकी हमले का मुकदमा और शक्ति मिल्स बलात्कार का मुकदमा शामिल हैं। उन्होंने 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ा था। चुनाव लड़ने से पहले, निकम ने 29 मामलों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने से इस्तीफा दे दिया था। इनमें पालंदे के खिलाफ मामले और 26/11 का मुकदमा शामिल था। चुनाव हारने के बाद, वह इनमें से कुछ मामलों में एसपीपी के रूप में फिर से पेश हुए।
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