दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि महज संबंध टूटने को आत्महत्या के लिए उकसाने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।न्यायमूर्ति मनोज जैन ने एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। उस पर अपनी पूर्व प्रेमिका को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है। आरोपी की शादी दूसरी महिला से होने पर व्यक्ति की पूर्व प्रेमिका ने फंदे से लटक कर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।

उकसावे पर कोर्ट की टिप्पणी

आरोपी को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि उकसावा इस तरह का होना चाहिए कि पीड़ित के पास आत्महत्या करने के सिवा कोई और विकल्प न बचे। अदालत ने कहा कि केवल मुकदमे की सुनवाई से ही यह तय हो सकेगा कि यह कठोर कदम उकसावे के कारण उठाया गया था या फिरअति संवेदनशील युवती होने के कारण। वर्तमान मामले में, अदालत ने गौर किया कि मृत्यु पूर्व कोई बयान नहीं दिया गया था और दोनों पक्ष लगभग आठ वर्षों से रिश्ते में थे, जिस दौरान महिला (मृतका) की ओर से कोई शिकायत नहीं की गई थी।

अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत बंद होने की तिथि और आत्महत्या की तारीख के बीच लंबा अंतराल है। अदालत ने 24 फरवरी को पारित आदेश में कहा कि स्पष्ट रूप से यह रिश्ता टूटने का मामला प्रतीत होता है और संभवत: महिला को जब पता चला कि याचिकाकर्ता ने किसी और से शादी कर ली है, तो उसने आत्महत्या करने का विकल्प चुना। अदालत के आदेश में कहा गया है कि हालांकि आजकल रिश्ते टूटना और दिल टूटना आम बात हो गई है, लेकिन केवल संबंध टूटना ही अपने आप में उकसाने का मामला नहीं माना जा सकता, ताकि इसे भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत अपराध माना जा सके।

पूरा मामला क्या है?

मृतका के पिता के अनुसार, उनकी बेटी को आरोपी ने बहलाया-फुसलाया था और शादी के लिए उस पर अपना धर्म बदलने का दबाव डाला था। इसी दबाव के कारण उनकी बेटी ने अक्तूबर 2025 में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। आरोपी को नवंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने कहा कि महिला के दोस्तों के अनुसार, वह परेशान थी और कहा कि धर्म परिवर्तन के लिए उस पर कभी दबाव नहीं बनाया गया था। अदालत ने कहा कि आरोपी ने फरवरी 2025 से उससे बात करना बंद कर दिया था।

आदेश के अनुसार, व्यक्ति को 25,000 रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही रकम की जमानत राशि पर जमानत पर रिहा कर दिया गया। आरोपी ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच लगभग आठ वर्षों से मधुर संबंध थे लेकिन महिला के माता-पिता इस रिश्ते के खिलाफ थे क्योंकि वे अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखते थे। व्यक्ति ने आरोप लगाया कि महिला के माता-पिता ने ही उसे संबंध तोड़ने के लिए मजबूर किया था।

इस समय एनसीआरटी बनाम सुप्रीम कोर्ट एक मामला भी चर्चा में बना हुआ है। एक चैप्टर को लेकर ऐसा विवाद छिड़ा है कि एनसीआरटी को माफी मांगनी पड़ी है, पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें