सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को AIIMS के कार्यवाहक निदेशक को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत इस बात से नाराज थी कि जब उसने स्पष्टीकरण मांगा है तो हलफनामा दाखिल क्यों किया गया। मामला डीएनए परीक्षण से जुड़ा है, जो समय पर नहीं किया गया था।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने शुरुआत में कार्यवाहक निदेशक के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया। लेकिन उनके न्यायालय में उपस्थित होने के बाद इसे वापस ले लिया।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि कार्यवाहक पद पर होने से जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती और पद पर बैठे अधिकारी को कोर्ट के आदेशों का पालन करना ही होगा।
कोर्ट ने कहा, “हमने स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन फिर भी हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। इतनी लापरवाही क्यों? हम हैरान हैं। अहंकार को घर पर ही छोड़ दें।”
यह मामला एक ऐसे प्रकरण से जुड़ा था जिसमें शीर्ष अदालत ने अक्टूबर 2025 में एक बच्चे का DNA परीक्षण कराने का निर्देश दिया था,लेकिन निर्धारित समयसीमा के अंदर परीक्षण नहीं कराया गया। एम्स ने परीक्षण में हो रही देरी की वजह संबंधित अधिकारी के सेवानिवृत्त हो जाने को बताया, जिसे अदालत ने अस्वीकार्य माना और कहा कि आवश्यकता होने पर संस्थान अदालत से उचित अनुमति मांग सकता था।
इसके बाद जब कोर्ट ने कार्यवाहक निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा, तब उन्होंने स्पष्टीकरण की जगह हलफनामा दाखिल कर किया। इस पर जस्टिस अमानुल्लाह ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “हमने आपसे स्पष्टीकरण मांगा था। आप हमें जवाब दे रहे हैं? अदालत के आदेशों के प्रति इतना लापरवाह रवैया क्यों?”
इसके बाद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी के अनुरोध पर पीठ ने कार्यवाहक निदेशक को हलफनामे में संशोधन कर उसे स्पष्टीकरण के रूप में दाखिल करने की इजाजत दे दी। हालांकि, कार्यवाहक निदेशक ने बिना शर्त माफी मांग ली थी और डीएनए परीक्षण भी पूरा हो चुका था। इसलिए शीर्ष अदालत ने अवमानना कार्यवाही को आगे नहीं बढ़ाया और केस को बंद कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना और तमिलनाडु के नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इन अधिकारियों से उन जर्जर इमारतों को गिराने या खाली कराने के लिए की गई कार्रवाई की स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है, जिनसे आपदा का खतरा हो सकता है। पढ़ें पूरी खबर।
