वैष्णो देवी यात्रा के लिए टिकट बुक करने वाले एक यात्री को यात्रा रद्द होने के बाद रेलवे से पूरा रिफंड नहीं मिला। अब सोनीपत जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे बोर्ड को यात्री के 7,350 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए 5,000 रुपये मुआवजा और 11,000 रुपये मुकदमे का खर्च भी देने का निर्देश दिया है। यानी यात्री को कुल 23,350 रुपये मिलेंगे।
मामला अगस्त 2025 के आखिरी सप्ताह का है। भूस्खलन के कारण वैष्णो देवी यात्रा मार्ग प्रभावित हुआ था और वैष्णो देवी ट्रस्ट ने यात्रा रोक दी थी। इस दौरान कटरा जाने वाली कई ट्रेन और बस सेवाएं भी निलंबित कर दी गई थीं। इसके चलते यात्री को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी।
नई दिल्ली से कटरा और वापसी का टिकट कराया था बुक
शिकायतकर्ता ने 31 अगस्त 2025 को नई दिल्ली से कटरा जाने और 1 सितंबर 2025 को कटरा से नई दिल्ली लौटने के लिए रेलवे के दो टिकट बुक किए थे। दोनों टिकटों के लिए उसने कुल 14,700 रुपये का भुगतान किया था।
भूस्खलन और यात्रा रोके जाने के बाद रेलवे ने कटरा जाने वाली ट्रेन सेवा रद्द कर दी। यात्री ने अपनी पूरी यात्रा रद्द करने और दोनों टिकटों का रिफंड देने का अनुरोध किया। रेलवे ने नई दिल्ली से कटरा वाले टिकट के 7,350 रुपये तो वापस कर दिए, लेकिन वापसी के टिकट की रकम नहीं लौटाई।
यात्री ने रेलवे से कई बार रिफंड की मांग की, लेकिन उसे पूरी रकम नहीं मिली। इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
रेलवे ने कहा- यात्री ने खुद टिकट कैंसिल नहीं किया
मामले में रेलवे बोर्ड को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वह आयोग के सामने पेश नहीं हुआ। इसके बाद मामले में रेलवे को एकतरफा कार्रवाई के तहत आगे बढ़ाया गया।
रेलवे की ओर से यह तर्क दिया गया कि यात्री ने न तो वापसी की ट्रेन में सफर किया और न ही खुद टिकट कैंसिल कराया। इसी आधार पर वापसी के टिकट का किराया वापस नहीं किया गया था।
आयोग ने रेलवे के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि जब यात्री कटरा तक पहुंच ही नहीं पाया, तो उसके लिए वहां से वापसी की ट्रेन पकड़ना संभव नहीं था।
छह घंटे पहले बहाल हुई थी वापसी की ट्रेन
आयोग ने रेलवे के संदेशों को भी देखा। इनमें सामने आया कि वापसी की ट्रेन को शुरुआत में परिचालन संबंधी कारणों से रद्द किया गया था। बाद में इसे निर्धारित समय से सिर्फ छह घंटे पहले बहाल किया गया।
आयोग ने कहा कि ऐसी स्थिति में यात्री के लिए कटरा पहुंचकर कुछ ही घंटों में वापसी की ट्रेन पकड़ना संभव नहीं था। इसलिए रेलवे का यह कहना उचित नहीं था कि यात्री वापसी की ट्रेन में सवार हो सकता था या खुद टिकट कैंसिल करा सकता था।
आयोग ने कहा कि यात्री ने दोनों तरफ के टिकट रद्द करने का अनुरोध किया था, लेकिन रेलवे ने उसकी किसी गलती के बिना एक तरफ का किराया रोक लिया।
रेलवे की सेवा में कमी मानते हुए दिया आदेश
सोनीपत जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष विजय सिंह और सदस्य श्याम लाल व दीप जैन की पीठ ने कहा कि उपलब्ध सबूतों से रेलवे की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार साबित होता है।
आयोग ने रेलवे बोर्ड को यात्री को 7,350 रुपये का बाकी किराया वापस करने का आदेश दिया। इसके साथ ही 5,000 रुपये मुआवजे और 11,000 रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने को कहा गया। इस तरह यात्री को कुल 23,350 रुपये मिलेंगे।
क्या है इस फैसले का मतलब?
आयोग ने इस मामले में यह भी स्पष्ट किया कि जब प्राकृतिक आपदा या अन्य ऐसी परिस्थितियों के कारण यात्रा करना संभव नहीं हो और रेलवे की ट्रेन सेवा भी प्रभावित हो, तो केवल इस आधार पर यात्री का किराया नहीं रोका जा सकता कि उसने टिकट खुद कैंसिल नहीं किया या ट्रेन में सवार नहीं हुआ।
ऐसी स्थिति में यात्रियों को टिकट, ट्रेन रद्द होने के संदेश और रेलवे से किए गए रिफंड अनुरोध जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। किसी शिकायत की स्थिति में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के नंबर 1915 पर संपर्क किया जा सकता है। हरियाणा के लिए उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-180-2087 है।
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भारतीय रेलवे त्योहारों के सीजन से पहले टिकटों की जांच को लेकर सख्त होने जा रहा है। सेंट्रल रेलवे की ओर से 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष टिकट चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान टिकट की वैधता के साथ-साथ यात्रियों के पहचान पत्र और पात्रता से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
