कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बार-बार सुनवाई टलने पर टिप्पणी की। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने कहा कि यह मामला एक तरह से ‘जिंक्स्ड’ (अटका हुआ) है और लगातार एक तारीख के बाद दूसरी तारीख मिल रही है।

सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हो रही थी जिसमें एक हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों की ओर से प्रतिनिधि माना गया था।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट में मामले के पक्षकारों के बीच किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई है। इससे पहले हिंदू पक्ष के बीच इस विवाद को लेकर समझौते की संभावना जताई गई थी।

इस पर पीठ ने कहा कि उसे सभी पक्षों को सुनना होगा। कोर्ट ने टिप्पणी की, ”यह मामला इस मायने में जिंक्स्ड (अटका हुआ) है। एक तारीख के बाद दूसरी तारीख पर सुनवाई टल रही है।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को अब उसके गुण-दोष के आधार पर सुनेगा। हालांकि, समय की कमी के कारण बुधवार को सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर के लिए तय कर दी।

क्या है कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद?

यह विवाद मथुरा में स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर है। हिंदू पक्ष की ओर से सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दावा किया गया था कि मस्जिद कृष्ण जन्मभूमि की जमीन पर बनाई गई है।

यह मुकदमा हिंदू देवता भगवान श्रीकृष्ण विराजमान और कुछ हिंदू भक्तों की ओर से दायर किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने मस्जिद को मौजूदा स्थान से हटाने की मांग की थी।

हिंदू पक्ष ने यह भी दावा किया कि कुछ ऐसे संकेत मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि शाही ईदगाह मस्जिद वास्तव में एक हिंदू मंदिर है। इसी आधार पर विवादित स्थल की जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग भी की गई थी।

पहले सिविल कोर्ट ने खारिज किया था मुकदमा

मामले में सितंबर 2020 में सिविल कोर्ट ने मुकदमा खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इसके पीछे पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के तहत मामले पर रोक का हवाला दिया था।

इसके बाद इस फैसले को चुनौती दी गई। मई 2022 में मथुरा जिला अदालत ने सिविल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि मुकदमा सुनवाई योग्य है।

बाद में 2023 में इस मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। अब इसी विवाद से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

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2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और UPI कमेटी समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।