इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ईरानी धार्मिक नेताओं अयातुल्लाह सैयद अली खामनेई और अयातुल्लाह सैयद अली अल-सिस्तानी सहित अन्य शिया धर्मगुरुओं के पोस्टर हटाने से पुलिस को रोकने की मांग वाली जनहित याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप अत्यंत सामान्य और अस्पष्ट हैं, जिनमें किसी विशिष्ट घटना का उल्लेख नहीं है।

जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में पुलिस के हस्तक्षेप के संबंध में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। ऐसे आधार पर जनहित याचिका पर आगे कार्रवाई नहीं की जा सकती।

अदालत ने 7 जुलाई के अपने आदेश में कहा, “याचिका में पुलिस द्वारा ईरान के कुछ धार्मिक नेताओं के पोस्टर जो शिया समुदाय के लिए सम्माननीय हैं, कथित रूप से अवैध तरीक से हटाने और हस्तक्षेप करने के बारे में केवल सामान्य और अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं।”

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सका कि किस घर या परिसर में पोस्टर लगाए गए थे, उन्हें कब और कैसे हटाया गया, या पुलिस ने किस विशेष मामले में हस्तक्षेप किया। ऐसे किसी ठोस उदाहरण या साक्ष्य के अभाव में अदालत ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

यह याचिका मजलिस उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद नकवी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए जाएं कि वे ईरानी धार्मिक नेताओं के चित्रों और पोस्टरों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों या धार्मिक शोक सभाओं एवं आयोजनों में भाग लेने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करें।

‘अहंकार को घर पर ही छोड़ दें’, जवाब से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS के एक्टिंग डायरेक्टर को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को AIIMS के कार्यवाहक निदेशक को कड़ी फटकार लगाई है। शीर्ष अदालत इस बात से नाराज थी कि जब उसने स्पष्टीकरण मांगा है तो हलफनामा दाखिल क्यों किया गया। मामला डीएनए परीक्षण से जुड़ा है, जो समय पर नहीं किया गया था। पढें पूरी खबर।