केरल के तिरुवनंतपुरम में जिला कंज्यूमर फोरम ने कोचिंग संस्थानों की फीस और रिफंड को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। दरअसल, आयोग ने कहा है कि कोई भी कोचिंग संस्थान किसी छात्र के कोर्स बीच में छोड़ने पर उसकी पूरी फीस नहीं रख सकता। आयोग ने NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा के मामले में यह फैसला सुनाया।
आयोग ने ‘नो-रिफंड’ क्लॉज को गलत ट्रेड प्रैक्टिस बताते हुए कहा कि कोचिंग संस्थानों को स्टूडेंट के द्वारा किसी कारणवश कोर्स बीच में छोड़ देने के बाद उनकी फीस को वापस करना चाहिए। यह मामला NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा से जुड़ा है। छात्रा की मां ने कोचिंग संस्थान में एडमिशन के लिए 82,600 रुपये की फीस जमा कराई थी, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण छात्रा रेग्युलर क्लास नहीं ले पाई और कोर्स बीच में ही छोड़ दिया।
फोरम ने 70 हजार रुपये कराए वापस
इसके बाद परिवार ने कोचिंग संस्थान से बची हुई फीस वापस करने की मांग उठाई, लेकिन संस्थान की ओर से रिफंड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिवार ने कंज्यूमर फोरम जाने का फैसला किया। तिरुवनंतपुरम डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कोचिंग संस्थान को यह आदेश दिया कि छात्रा को 70,600 रुपये का रिफंड दिया जाए।
आयोग ने 8 हजार रुपये का मुआवजा भी दिलाया
आयोग के अध्यक्ष पीवी जयराजन और सदस्य प्रीथा जी नायर और विजू वीआर ने आदेश दिया कि छात्रा की फीस के तौर पर 12,000 रुपये काटे जाए और बाकी का पैसा वापस कर दिया जाए। इसके अलावा संस्थान को छात्रा के परिवार को 8 हजार रुपये का मुआवजा भी देना होगा।
‘फीस वापस नहीं करना गलत ट्रेड प्रैक्टिस है’
आयोग ने इस फैसले को सुनाते हुए कहा कि अगर कोई छात्र किसी कोचिंग संस्थान में एडमिशन लेता है और पूरी फीस जमा करा देता है फिर किसी कारणवश वह बीच में ही उस कोर्स को छोड़ता है तो कोचिंग संस्थान को जायज फीस रिफंड करनी होगी। आयोग ने कहा कि पहले से पूरी फीस लेना और बाद में किसी भी परिस्थिति में उसे वापस न करना एक गलत ट्रेड प्रैक्टिस है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि छात्रा ने जून 2022 में कोचिंग शुरू की थी। शुरुआती दिनों में छात्रा ने कुछ क्लास अटेंड की थी, लेकिन गर्दन और पीठ में लगातार दर्द की समस्या के कारण उसे इलाज और आराम की सलाह दी गई। बाद में उसने दूसरे बैच में भी शामिल होने की कोशिश की, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानी और संस्थान के प्रबंधन के रवैये से असहज होने के बाद कोर्स छोड़ दिया।
कोचिंग संस्थान ने रिफंड का विरोध करते हुए कहा कि फीस का एक हिस्सा स्टडी मटीरियल, क्वेश्चन पेपर और OMR शीट आदि तैयार करने में खर्च हो चुका है। हालांकि आयोग ने संस्थान की इस दलील को स्वीकार नहीं किया और इस्तेमाल की गई सेवाओं की फीस काटकर बाकी रकम लौटाने का आदेश दिया। आयोग ने यह फैसला 18 अगस्त को सुनाया।
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